Monday, 1 April 2013

दबाव के आगे न झुकें अधिकारी


नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को नव चयनित नौकरशाहों से कहा कि वे सेवा के दौरान विभिन्न हल्कों से आने वाले दबाव के बाद भी मजबूती से खड़े रहें और बदलाव के प्रतिनिधि बनें।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के नए बैच को संबोधित करते हुए कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि नए अधिकारी अपने मन में ध्यान रखें कि वे आधारभूत स्तर पर जनता की सेवा कर रहे हैं।
मंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे बदलाव के प्रतिनिधि हैं और लोग उनसे अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद रखेंगे।

आईएएस कम मेहनत से पाएं बेहतर स्कोर


सिविल सेवा परीक्षा में काफी स्टूडेंट्स मुख्य परीक्षा के लिए चयनित होते हैं, लेकिन इनमें से कुछ स्टूडेंट्स ही इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई कर पाते हैं। यदि आप भी इसकी तैयारी में जुटे हैं और प्रारंभिक परीक्षा के प्रति आश्वस्त हैं, तो आप इस परीक्षा में पूछे जानेवाले विषयों से अवगत हों। मुख्य परीक्षा में निबंध अनिवार्य विषय है। यहां निबंध 200 अंकों का होता है।
प्रश्नों के अनुरूप करें तैयारी
मुख्य परीक्षा के निबंध के प्रश्नपत्र में छ: निबंध दिए जाते हैं। इनमें से किसी एक पर तीन घंटे की अवधि में लिखना होता है। आदर्श निबंध लगभग 1800-2000 शब्दों में लिखना चाहिए।
पहले ही तय कर लें टॉपिक
निबंध में बेहतर अंक के लिए पहले निबंध के विषय क्षेत्र को चयनित करना जरूरी है। यदि आप परीक्षा में पूछे गए निबंध को देखेंगे, तो सामान्य तौर पर निबंध के क्षेत्र महिला विषय से संबंधित, साहित्य क्षेत्र, विज्ञान व प्रौद्योगिकी विषयों से संबंधित, समकालीन मुद्दों आदि से संबंधित तथा एक निबंध जीवन-जगत के दार्शनिक पहलुओं से संबद्ध उच्च चिंतन का होता है। बेहतर होगा कि आप पहले ही अपनी रुचि के अनुरूप एक विषय को चुन लें और उसी से संबंधित तैयारी पर फोकस करें।
व्यवस्थित और तर्कपूर्ण लिखें
इस पेपर का मकसद आपकी सोच, भाषा-शैली और सहज अभिव्यक्ति को परखना है। आप जिस विषय पर निबंध लिखना चाहते हैं, उससे संबंधित मैटेरियल एकत्रित कर लें। जहां भी एनालिटिकल और महत्वपूर्ण लेख मिले उसे अवश्य पढें और महत्वपूर्ण सेंटेंस और वक्तव्य को डायरी में नोट करते चलें। निबंध में लेखन क्रमबद्ध, संक्षिप्त एवं मौलिक होना चाहिए। उत्तर लिखते समय प्रश्न के सभी पहलुओं का ध्यान रखें, क्योंकि अगर कोई भी पहलू छूट गया, तो उत्तर अधूरा माना जाएगा। बेहतर होगा कि उत्तर लिखने से पहले ही इसका एक खाका अपने दिमाग में या फिर रफ पेपर पर बना लें, जिसमें बिंदुओं के रूप में उन बातों को लिख लें, जिन्हें अपने उत्तर में शामिल करना है। निबंध लिखने के बाद अपने उत्तरों पर पुन: एक नजर डालें, ताकि कोई गलती न रह जाए। इसके अलावा आवश्यक बिंदुओं को हाईलाइटर या स्केच पेन से रेखांकित भी कर दें।
विजय झा

तबादलों का ताजा दौर


उत्तर प्रदेश में आइएएस, आइपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों से कई सवाल खड़े होते हैं। आश्चर्यजनक है कि बड़ी संख्या में आइएएस, आइपीएस, पीसीएस और पीपीएस अधिकारियों का तबादला तो कर दिया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि दर्जनों अधिकारियों को इधर से उधर कर देने का निर्णय किन कारणों से लिया गया? हो सकता है कि अधिकारियों के तबादलों के संदर्भ में राज्य सरकार की ओर से यह कहा जाए कि ऐसा शासन की जरूरत के तहत किया गया है, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि एक वर्ष के अंदर ही दूसरी या तीसरी बार इतने बड़े पैमाने पर तबादले कर दिए गए। इसके पहले राज्य में सपा की सरकार बनते ही करीब-करीब प्रत्येक अधिकारी को ताश के पत्तों की तरह इधर से उधर कर दिया गया था। चूंकि उत्तर प्रदेश में शासन में परिवर्तन होते ही अधिकारियों के तबादलों का एक रिवाज सा बन गया है इसलिए अधिकारियों का स्थानांतरण अपेक्षित भी था, लेकिन तबादलों के ताजे दौर का औचित्य समझना कठिन है। यदि इतने बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादले उन शिकायतों के चलते किए गए जिनके तहत यह कहा जा रहा था कि नौकरशाही सही ढंग से कार्य नहीं कर रही है और उसके खिलाफ सख्ती का परिचय देने की आवश्यकता है तो भी यह कहना कठिन है कि इन तबादलों से कुछ विशेष हासिल हो सकेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि उत्तर प्रदेश में अब ऐसी स्थिति बन गई है कि तबादलों को किसी दंड की संज्ञा नहीं दी जा सकती। यदि यह सोचा जा रहा है कि रह-रहकर किए जाने वाले तबादलों से नौकरशाही पर सही तरह काम करने के लिए दबाव बनाया जा सकता है तो ऐसा कुछ होने के आसार न के बराबर ही हैं। बेहतर हो कि राज्य सरकार उन तौर-तरीकों की खोज करे जिनकी मदद से प्रशासनिक तंत्र को पटरी पर लाया जा सकता है। जब तक ऐसा नहीं किया जाता तब तक न तो नौकरशाही के कामकाज की खामियां दूर होने वाली हैं और न ही प्रशासनिक तंत्र से आम जनता और शासन की अपेक्षाएं पूरी होने वाली हैं।
[स्थानीय संपादकीय: उत्तर प्रदेश]

आईएएस: बदला पैटर्न, बदली चुनौती


संघ लोकसेवा आयोग ने इस साल से मुख्य परीक्षा में कई महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं। माना जा रहा है यूपीएससी की यह पहल पाठ्यक्रम को और ज्यादा व्यापक व प्रतिस्पर्धी बनाने में मददगार होगी। लेकिन इसके चलते मुख्य परीक्षा दे रहे तमाम उम्मीदवारों की तैयारियों पर बडा फर्क?पडेगा। उनमें से ज्यादातर को अपनी तैयारी का खाका नए सिरे से खींचना पड सकता है। इसमें सबसे ज्यादा समस्याएं उन छात्रों के समक्ष खडी होंगी जो एक से अधिक बार प्रारंभिक परीक्षा क्वालीफाई कर मुख्य परीक्षा में बैठ चुके हैं।
मुख्य परीक्षा के महत्वपूर्ण बदलाव
सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषयों की जीएस को अधिक महत्व दिया गया है। अब से मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषयों के 250-250 अंकों के कुल 500 अंकों के दो पेपर होंगे। जबकि पहले दो विषयों के 600-600 अंकों के कुल 1200 अंकों के चार प्रश्नपत्र हुआ करते थे। वैकल्पिक विषयों के दबाव को हल्का करने में आयोग की सोच ऐसे कैंडीडेट्स के चयन की है जो हर चीज की थोडी-थोडी जानकारी रखते हों।
जीएस हुआ निर्णायक
यूं तो सामान्य ज्ञान हमेशा से ही आईएएस परीक्षा में महत्वपूर्ण?भूमिका निभाता है। लेकिन पैटर्न?में बदलाव से इसकी भूमिका पहले से और बढ गई है। सिविल सेवा परीक्षा 2013 में सामान्य अध्ययन के चार अनिवार्य पेपर होंगे। इनमें से प्रत्येक 250 अंक का होगा। पहले जीएस में 300-300 अंकों के महज दो प्रश्न पत्र ही हुआ करते थे। बदलती वैश्विक जरूरतों के मुताबिक इसमें नैतिकता, अखंडता, अचारनीति, अभियोग्यता जैसी नई चीजें जोडी गई हैं।
अंग्रेजी बना स्कोरिंग सब्जेक्ट
परीक्षा पैटर्न में बदलावों से अंग्रेजी ज्ञान का महत्व बढा है। इसके जरिए अब मुख्य परीक्षा के प्रथम पेपर के दूसरे सेक्शन में इंग्लिश कॉम्प्रिहेंसन व इंग्लिश प्रेसी के 100 अंकों के प्रश्न अनिवार्य कर दिए गए हैं। पहले जहां इस सेक्शन को केवल क्वालीफांइग माना जाता था लेकिन अब से ये आपकी स्कोरिंग व मेरिट पर सीधा असर डालेगा। विशेषज्ञों की राय में अब तक अंगे्रजी में कामचलाऊ नॉलेज के जरिए क्वालीफाई?हो जाने वाले कैंडीडेट्स के समक्ष इस बदलाव से बडी चुनौती खडी हो गई है।
साक्षात्कार का भी बदला चेहरा
आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा में फेरबदल की आयोग की पहल से साक्षात्कार पर भी प्रभाव पडा है। अब से साक्षात्कार पहले के 300 के बजाय केवल 275 अंकों का होगा।
बदला तैयारी का परिदृश्य
आईएएस मुख्य परीक्षा के पेपर में काफी फेरबदल किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अगर आप अपनी तैयारी नए सिरे से करते हैं तो आपकी तैयारी औरों से बेहतर हो सकती है। क्या हो नई रणनीति..
हालिया बदलावों के मद्देनजर सामान्य अध्ययन की महत्ता बढी है। लिहाजा आपको इसमें न केवल अपनी पकड बनानी होगी बल्कि अध्ययन की दृष्टि से इसमें व्यापकता भी लानी होगी। जिस तरह से सिलेबस में नई?सामाजिक-आर्थिक जरूरतों के चलते सहज योग्यता, नैतिकता, अखंडता जैसे विषय जोडे गए हैं, परीक्षार्थियों को इसके लिहाज से अपनी रणनीति तय करनी होगी। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस परीक्षा में जीएस का कद जिस तरह बढाया गया है अब वे ही कैंडीडेट्स सफलता का स्वाद चख सकेंगे जिन्होंने इसका गहन अध्ययन किया होगा।
इंग्लिश पर मजबूत पकड है अनिवार्य- भारतीय प्रशासनिक सेवा एक अखिल भारतीय परीक्षा है?जिसमें एक बार अंतिम रूप से चयनित हो जाने पर आपको देश के किसी भी हिस्से में पोस्टिंग के लिए तैयार रहना होता है। ऐसे में यदि इंग्लिश पर कमांड नहीं है तो काम के दौरान परेशानियों का सामना करना पड सकता है। शायद यही कारण है कि प्रथम पेपर के द्वितीय सेक्शन में अब इंग्लिश कंम्प्रिहेंशन, पैशेज राइटिंग जैसी चीजों को अनिवार्य बना दिया गया है और अब ये महज क्वालीफाइंग नहीं बल्कि मेरिट पर असर डालेंगी। हिंदी माध्यम से आने वाले उम्मीदवारों को इस क्षेत्र में तगडी मेहनत करनी होगी। स्तर हाईस्कूल का होगा। इस विषय की बल्क स्टडी नहीं बल्कि क्वालिटी स्टडी महत्वपूर्ण है।
वैकल्पिक विषयों के अध्ययन की नई रणनीति- इस बार वैकल्पिक विषयों का वेटेज कम किया गया है। इस कारण वे उम्मीदवार जिनकी परीक्षा की तैयारी अब तक वैकल्पिक विषयों के इर्द गिर्द घूमती थी, उन्हें अपनी तैयारियों का पुनरावलोकन करना होगा। और देखना होगा कि इन विषयों पर किया गया अतिरिक्त फोकस कहीं दूसरे सेक्शन के अध्ययन को तो प्रभावित नहीं कर रहा है।
सीसैट: जीत से कम कुछ नहीं
प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया के सबसे बडे इम्तिहान आईएएस की प्रारंभिक परीक्षा आगामी 26 मई को है। चूंकि अब वक्त कम है और करने को बहुत कुछ है? इसलिए आवश्यक है कि जल्द से जल्द 2011 से बदले सीसैट पैटर्न?के अनुरूप अपनी तैयारियों को अंतिम रूपरेखा दी जाए।
विशेषज्ञ मानते हैं कि नए पैटर्न के आ जाने से छात्रों की परेशानी कम हो रही है बल्कि अब छात्र कम प्रयास में ही सेलेक्टिव अध्ययन में ही प्रिलिम्स क्वालीफाई कर रहे हैं। जबकि पहले विषय पर पकड बनाने में ही उनकी अधिकांश ऊर्जा खप जाती थी। अन्य लिहाज से देखें तो सीसैट के सेकेंड पेपर में पूछी जाने वाली ज्यादातर चीजें जैसे न्यूमेरिक्स, कॉम्प्रिहेंसन, जनरल सांइस, इंग्लिश, लॉजिकल रीजिनिंग अमूमन सभी परीक्षाओं में आम होती हैं। लिहाजा लगातार प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो रहे छात्रों के लिए प्रिलिम्स का लाल बुझक्कड समझना कठिन नहीं रहा।
इंडियन हिस्ट्री- इसके अध्ययन हेतु 11वीं, 12वीं, एनसीईआरटी, सुमित सरकार विपिन चंदा, स्पेक्ट्रम ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ इंडिया पुस्तकें उल्लेखनीय हैं।
इंडियन पॉलिटी एंड गवर्नेस- इसकेअंतर्गत राज्य व्यवस्था, पंचायती राज्य, संविधान आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं। बेहतर अंक के लिए सुभाष कश्यप (अवर कॉन्स्टीट्यूशन), डीडी बसु (कॉन्स्टीट्यूशन ऑफ इंडिया) लक्ष्मीकांत (इंडियन पॉलिटी) उपयोगी हैं।
जनरल साइंस- इस पेपर में बेहतर करने के लिए हिंदू संाइस सप्लीमेंट, विजार्ड स्पेशल सप्लीमेंट फॉर सांइस का अध्ययन अनुशंसित है।
इकोनॉमिक एंड सोशल डेवलेपमेंट- इसमें अच्छे अंक के लिए बजट, इकोनॉमी सर्वे, सोशल सेक्टर स्पेंडिंग, डब्लूटीओ टर्मनेलॉजी, फॉरेन इंवेस्टमेंट, सरकारी नीतियों का अध्ययन करें। योजना, कुरुक्षेत्र, दत्त व सुंदरम की इकोनॉमी हिंदू इकोनॉमिक सर्वे, बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार आपकी राह सुगम बना सकते हैं। भारत व विश्व का भूगोल- ज्योग्राफी में प्रमुख नदियां, पर्वत, पत्तन, वायुमार्ग, फिजिकल ज्योग्राफी के प्रश्नों की संख्या ज्यादा रहती है। अध्ययन के लिहाज से जीसी लिओंग की सर्टिफिकेट फिजिकल एड ह्यूमन ज्याोग्राफी, इंडिया ईयर बुक को वरीयता दें।
करेंट अफेयर्स- इसके पूर्ण अध्ययन के लिए एक राष्ट्रीय स्तर के अखबार, उसके संपादकीय का गहन व नियमित अध्ययन इस प्रभाग से पार पाने का सबसे पुख्ता जरिया है। इस दौरान जागरण ईयर बुक के साथ आसपास घटने वाली घटनाओं से भी अपडेट रहें।
द्वितीय पेपर की तैयारी
कॉम्प्रिहेंसन
कॉम्प्रिहेंसन हिंदी व इंग्लिश दोनों में ही पूछे जाते हैं। तैयारी के दौरान यदि आप नियमित हिंदी इंग्लिश अखबार का अध्ययन करते आएं हैं तो यहां बेहतर करने की खूब गुंजाइश है। विशेषज्ञों का मानना है कि पैसेज हल करने के पूर्व उसे दो से तीन बार पढें, पैसेज को कथानक के रूप में दिमाग में बैठाने की कोशिश करें। अध्ययन के लिए हाईस्कूल स्तर क ी किताबें सही रहेंगी।
इंटरपर्सनल स्किल्स
कैंडीडेट्स की क म्यू-निकेशन क्षमताओं को परखने के लिए इंटरपर्सनल स्किल्स उपयोगी होती हैं। प्रश्नपत्र प्रारूप में इसमें फिल इन द ब्लैंक्स, सिनोनिम्स, एंटोनिम्स, एनालॉग, जंबल पैराग्राफ, वर्ड सब्सीट्यूशन जैसी चीजें आती हैं। लाजिकल रीजनिंग एंड एनालिटिकल एबिलिटी इसके अंतर्गत भविष्य के प्रशासकों की व्यवहारिक क्षमता का आकलन होता है। यही कारण है कि इसमें पूछे जाने वाले प्रश्नों का दायरा कैट, बैंक पीओ एग्जाम से थोडा अलग है। इस पार्ट में अच्छे अंक लाने के लिए ब्लड रिलेशनशिप, सिटिंग अरेंजमेंट, कोडिंग, डिकोडिंग पर खास ध्यान दें। आरएस अग्रवाल, टाटा मैग्रा एंड हिल की किताबें लाभप्रद साबित हो सकती हैं।
जनरल मेंटल एबिलिटी
इस प्रभाग में उम्मीदवार से सामान्य मानसिक क्षमता प्रदर्शन की अपेक्षा की जाती है। इसमें एज, रिलेशन, सेट्स, डाइस (पासा), डायरेक्शन, वेन आरेख, बेसिक काउंटिंग के सवालों पर ज्यादा ध्यान दें। इस परीक्षा की तैयारी के लिए पुराने सैंपल पेपर्स हल करना उपयोगी होगा।
डिसीजन मेकि ंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग
यहां आपक ो एप्लीकेशन बेस्ड क्वेश्चन हल करने होते हैं। अमूमन इन सवालों में आपको एक खास परिस्थिति में सही निर्णय करने की चुनौती दी जाती है।
बेसिक न्यूमेरेसी (साधारण अंकगणित)
इस सेक्शन में कैंडीडेट्स की सामान्य गणितीय क्षमताओं की परख होती है। इस दौरान यदि आप नंबर सिस्टम, एवरेज, टाइम-डिस्टेंस, प्रॉफिट लॉस जैसे सवालों पर ज्यादा फोकस करेंगे तो अच्छा होगा। डेटा इंटरप्रिटेशन के लिए ग्राफ, चार्ट, बार डॉयग्राम के प्रश्नों का अभ्यास अवश्य करें।
जेआरसी टीम

आफ्टर 10+2




12वीं की परीक्षाएं खत्म होने के बाद भी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। यदि आप भी 12वीं के बाद कॅरियर की आगामी दिशा और विभिन्न परीक्षाओं के बारे में पेशोपेश में हैं तो यहां दिए जा रहे विकल्प आपकी मदद कर सकते हैं.. कंपटीशन की खुली आजमाइश
एजूकेशन सिस्टम में 12वीं को एक बडा मील का पत्थर माना जाता है। इसकी रूपरेखा का निर्धारण ही कुछ इस प्रकार किया गया है कि छात्र आने वाले दौर में कॅरियर की कठिन चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। यही कारण है कि इसमें मैथ्स, बायो या फिर आ‌र्ट्स- सभी विषयों का स्तर काफी ऊंचा रखा जाता है और शायद इसी के चलते देश में होने वाली ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने की पात्रता की शर्त 12वीं पास होना होती है। इसमें उत्तीर्ण होने का मतलब है कि छात्र प्रतिस्पर्धा के नेक्स्ट लेवल पर जाने को तैयार है। केवल कंपटीशन ही क्यों, स्नातक स्तर पर जाने का पहला स्टैप भी12वीं हीं है। यदि आप भी इस पहले स्टैप को पार कर चुके हैं या फिर पार करने की तैयारी में हैं तो आपके सामने विकल्पों का पूरा संजाल है। किस तरफ जाना है और कैसे जाना है, यह आपको तय करना है।
अर्ली स्टार्ट, अर्ली रिजल्ट
कहा जाता है कि अर्ली स्टार्ट तभी काम आता है, जब उसको अंजाम तक पहुंचाने की एक ठोस योजना भी आपके पास हो। इन दिनों 10+2 के बाद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए कॅरियर में अर्ली स्टार्ट मिल रहा है, जहां वे कम उम्र में ही कॅरियर को मुकाम दे सकते हैं। आज वह दौर नहीं रहा, जिसमें छात्र पहले स्कूल, फिर कॉलेज की लंबी शक्षिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद कॅरियर के बारे में सोचा करते थे। इन दिनों इंजीनियरिंग से लेकर मेडिकल, डिफेंस, जर्नलिज्म व लॉ जैसे क्षेत्र 10+2 पासआउट स्टूडेंट्स के लिए अवसरों की खान साबित हो रहे हैं। आज इन कोर्स के जरिए सही मायने में उच्च गुणवत्ता वाले स्टूडेंट्स तैयार किए जा रहे हैं। कोर्स?पूरा करने के बाद बेहतरीन सैलरी पैकेज, सफल व्यावसायिक जिंदगी उम्मीदवारों का स्वागत करते हैं। लेकिन बडा प्रश्न है इनकी प्रवेश परीक्षाओं में चयन का। जवाब में विशेषज्ञों व आंकडों का निचोड कहता है कि अगर स्टूडेंट्स तैयारी के दौरान अपने जुझारू तेवर कायम रख सकें तो मुश्किल कुछ भी नहीं है।
इंजीनियरिंग- 0+2 (पीसीएम ग्रुप) से पास छात्रों के लिए इंजीनियरिंग आज भी सबसे पसंदीदा च्वाइस है। यहां हर वर्ष राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर इंजीनियरिंग परीक्षाओं का आयोजन होता है। इनमें क्वालीफाइड उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के अनुसार इंजीनियरिंग कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। यदि आप 12वीं मैथ्स ग्रुप के साथ तकनीकी मेधा से संपन्न हैं तो इंजीनियरिंग एक उम्दा राह हो सकती है।
डिजाइन में डेकोरेटिव क ॅरियर - अगर डिजाइन में रुचि है, तो आप बारहवीं के बाद इससे संबंधित कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं। अमूमन डिजाइन संस्थान अंडरग्रेजुएट कोर्स ऑफर करते हैं, जिसके लिए एक प्रवेश परीक्षा होती है। अगर आप डिजाइन में कॅरियर को नई उडान देना चाहते हैं, तो आपके लिए बेहतर कॅरियर विकल्प है।
मेडिकल में कॅरियर का मरहम- 0+2 बायोस्ट्रीम के छात्रों के लिए मेडिकल परीक्षा सबसे बडा लक्ष्य होती है। मेडिकल परीक्षाओं में एआईपीएमटी, एम्स, बीएचयू सबसे अहम हैं। यही नहीं आ‌र्म्स फोर्स मेडिकल एंट्रेस एग्जाम, मनिपाल पीएमटी, डीयू मेडिकल टेस्ट के साथ-साथ ज्यादातर राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं भी स्टूडेंट्स के लिए महत्वपूर्ण पडाव साबित होती हैं। ज्यादातर मेडिकल परीक्षाओं का आयोजन अप्रैल व मई महीनों में होता है।
डिफेंस है डिपेंडेबल कॅरियर- 12वीं के बाद डिफेंस की राह चलने वालों के लिए अवसरों की कमी नहीं है। साल में दो बार आयोजित होने वाली एनडीए परीक्षा इन युवाओं का सबसे बडा लक्ष्य होता है, जिसमें सफल होकर आप तीनों ही सेनाओं में बतौर ऑफिसर काम कर सक ते हैं। जाहिर है जो रुतबा और देश के लिए कुछ करने की संतुष्टि यहां है, वह और कहीं नहीं। केवल एनडीए ही नहीं नेवी, एयरफोर्स, कोस्ट गा‌र्ड्स में भी टेक्निकल और नॉन टेक्निकल कैटेगिरी में 12वीं उत्तीर्ण कैंडिडेट्स को मौके मिलते हैं।
और भी हैं राहें- न्यायालयों को देश में व्यवस्था संचालन की रीढ कहा जाता है। यदि आप भी इस रीढ का हिस्सा बन देश को मजबूत करना चाहते हैं तो क्लैट यानि कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट एक सुनहरा अवसर है। इस टेस्ट का उपयोग देश के 14 नेशनल लॉ स्कूल/यूनिवर्सिटीज अपने अंडर ग्रेजुएट व पीजी प्रोग्रामों में प्रवेश के लिए करते हैं। इसके अलावा आप बारहवीं के बाद सीए, सीएस, आईसीडब्ल्यूएआई परीक्षा भी दे सकते हैं।
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट
परीक्षा : 13 मई 2012
सीए, सीएस, आईसीडब्ल्यूएआई फाउंडेशन
परीक्षा : जून और दिसंबर
आईआईटी-जेईईई
परीक्षा : अप्रैल माह
एआईईईई
परीक्षा : 29 अप्रैल 2012
रेलवे एससीआरए
परीक्षा : जनवरी माह
एआईपीएमटी
परीक्षा : अप्रैल माह
एम्स एमबीबीएस
परीक्षा : जून 2012
आ‌र्म्ड फोर्स मेडिकल एग्जाम
परीक्षा : 6 मई
एनडीए एग्जाम
परीक्षा: 15 अप्रैल 2012
एयरफोर्स टेकिन्कल एग्जाम
आर्मी और नेवी एग्जाम
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ डिजाइन
परीक्षा : जनवरी माह
नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी
परीक्षा: जनवरी माह
नेशनल एप्टीटयूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर
परीक्षा: 15 मार्च, 2012
चुनो वही, जो हो सही
निर्णय लेना एक प्रक्रिया का हिस्सा है। अगर आप कुछ बातों को ध्यान में रखकर राह चुनेंगे, तो कामयाबी मिथक नहीं सच्चाई बन जाएगी..
12वीं कॅरियर की वह नाजुक डोर होती है, जिसके छूने भर से कॅरियर के पूरे खाके में झनझनाहट तय है। अब यह निर्भर क रता है कि आप इस डोर को छूकर कामयाबी का मधुर संगीत पैदा करते हैं या इसके टूट की वजह बनते हैं। वैसे भी आज का दौर उस जमाने जैसा नहीं रहा, जब कॅरियर निर्माण के कु छ गिने चुने ही रास्ते हुआ करते थे। आज रास्तों का पूरा संजाल फैल चुका है, लेकिन इससे एक नई समस्या छात्रों के समक्ष उठ खडी हुई है-समस्या सही विकल्प चुनने की। इस समस्या के बीच हम कुछ ऐसी चीजें दे रहे हैं, जिन्हें फॉलो करें तो 12वीं के बाद कई समस्याओं का हल निकल सकता है।
एरिया ऑफ इंट्रेस्ट- हम कक्षाएं तो पार करते रहते हैं, लेकिन न तो हमें और न ही हमारे अभिभावकों को पता रहता है कि आखिर हमारी रुचियां किस दिशा में हैं। इस कारण जरूरी है कि हम सबसे पहले अपनी रुचियों को समझें। इससे कॅरियर चयन में काफी आसानी होती है, क्योंकि हर इंसान का अपना ही व्यक्तित्व होता है जिसके अनुरूप वह अपने आस-पास की चीजों के प्रति एक खास रवैया रख पाने के काबिल होता है। आज की तारीख में 10+2 के बाद कॅरियर की कई च्वाइसेस इसी मानव व्यक्तित्व के इर्द गिर्द?घूमती हैं।
खूबी व कमजोरी जानो
मुक्केबाजी के खेल में अपर कट की अपनी ही अहमियत है, जिसमें विपक्षी मुक्केबाज सामने वाले के आंख के ऊपरी हिस्से पर चोट पहुंचाकर उसकी देखने की क्षमता को प्रभावित करता है। यदि मुक्केबाज अनुभवी है तो मुकाबले के दौरान अपने इस कमजोर पक्ष को प्रोटेक्ट करता है। कॅरियर के मुकाबले में भी यह रणनीति कारगर है।
स्किल्स का नहीं कोई अल्टरनेटिव- हर कंपनी चाहती है कि उसका इम्प्लॉई कंपनी के लिए अपना शत प्रतिशत दे। पर शत प्रतिशत दे पाना तभी संभव है, जब कर्मचारी अपने काम के साथ कुछ खास स्किल्स में भी निपुण हो। कम्यूनिकेशन स्किल्स, टेक्नोसेवी, भाषा पर अच्छी पकड, पर्सुएशन पावर, लीडरशिप, राइटिंग आदि ऐसी ही स्किल्स हैं। कॅरियर की लंबी यात्रा में अपनी सीट रिजर्व कराने के लिए इनमें से किसी एक स्किल्स में परफेक्ट होना जरूरी है।
कार्य की प्रकृति समझना अहम
देश की तेज इकोनॉमिक ग्रोथ ने संस्थानों की प्रकृति के साथ वहां के वर्क कल्चर को भी बदला है। इस कारण इनमें कार्य करने वालों के लिए संस्थानों की बदली प्रकृति के साथ खुद में परिवर्तन लाना भी जरूरी हो चला है। आज मीडिया से लेकर इंडस्ट्रियल यूनिट, मार्केटिंग तक सभी का नेचर ऑफ वर्क अलग-अलग है, जिनमें देर रात तक शिफ्ट, फील्ड वर्क जैसी चीजें आम हैं। यदि आप भी 12वीं बाद कॅरियर चुनते समय कार्य का नेचर समझेंगे तो बेहतर होगा।
वित्तीय साम‌र्थ्य- यह ठीक है कि एजूकेशन लोन व स्कॉलरशिप्स ने छात्रों की राहें आसान की हैं। खास कॅरियर विकल्प को चुनने से पहले अपनी व अपने परिवार की आर्थिक साम‌र्थ्य जरूर देखें। ऐसे कई उदाहरण हैं, जिसमें छात्रों ने एकाएक किसी कॅरियर के बारे में निर्णय लिया हो और बाद में संसाधनों की कमी के चलते उन्हें पीछे हटना पडा हो। पैरेंट्स से सलाह, कॅरियर कांउसलर से बातचीत इस बारे में आपकी राह आसान कर सकती है।
पहली पसंद एकेडमिक कोर्सेस
प्रोफेशनल कोर्स के बावजूद नामी कॉलेजों के एकेडमिक कोर्सेज में एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स कठिन मेहनत करते हैं। कुछ कॉलेजों में एडमिशन के लिए कट ऑफ सौ प्रतिशत तक पहुंच जाते हैं..
आज देश में कॅरियर बनाने के लिए तरह-तरह के कोर्स /शॉर्ट टर्म कोर्स उपलब्ध हैं, जिन्हें पूरा कर कॅरियर की श्योर गारंटी पाई जा सकती है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि परंपरागत स्नातक/परास्नातक शिक्षा का केंद्र कहे जाने वाले डिग्री कॉलेज अप्रासांगिक हो गए हैं। सच तो यह है कि प्रोफेशनल कोर्सो से मिल रही चुनौती के चलते इन्होंने अपना रंग ढंग तेजी से बदला है, जिसके चलते इन कॉलेजों का आकर्षण बढा है। आज स्थिति यह है कि बेहतरीन माहौल, विश्व स्तरीय फैकल्टी और एक से बढकर एक संसाधनों से लैस इन कॉलेजों में दाखिला बहुतेरे छात्रों का ख्वाब होता है और यहां से ¨सपल डिग्री लेने के बाद ही अच्छी नौकरी मिल जाती है। ऐसे में हम यहां देश के कुछ प्रमुख कॉलेज दे रहे हैं, जिसकेबीए, बीएससी, बीकॉम जैसे कोर्सो की रंगत देश के साथ विदेश में भी देखी व महसूस की जा रही है।
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स- दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले एसआरसीसी यानि श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की साख देश में ही नहीं पूरी दुनिया में है। देश के कुछ सबसे बेहतरीन शक्षिक संस्थानों में शुमार होने वाला एसआरसीसी में दाखिले का मतलब ही है भीड से अलग।
स्थापना वर्ष-1926
प्रमुख कोर्स-कॉमर्स व इकोनॉमिक्स, एमबीए सेंट जेवियर कॉलेज, कोलकाता- कलकत्ता यूनिवर्सिटी से संबद्ध इस कॉलेज के अंडरग्रेजुएट प्रोगाम में दाखिला मिलना अपने आप में प्रतिष्ठा का विषय होता है। कई सर्वे में यह कॉलेज टॉप 10 की पोजीशन पर बरकरार है।साल 2006 से इसे स्वायत्त दर्जा हासिल है।
प्रमुख कोर्स-बीकॉम, बीएससी
स्थापना वर्ष-1860
हंसराज कॉलेज, नई दिल्ली- हंसराज कॉलेज की गिनती दिल्ली यूनिवर्सिटी के सबसे बडे कॉलेजों में होती है। यह कॉलेज डीयू के नॉर्थ कैंपस में आता है। यहां की फैकल्टी काफी अच्छी है और यहां से पढने के बाद कॅरियर के अनेक क्षेत्रों में आसानी से इंट्री कर सकते हैं।
स्थापना वर्ष-1948
प्रमुख कोर्स- साइंस, आ‌र्ट्स, कॉमर्स
हिंदू कॉलेज,नई दिल्ली- डीयू के अंतर्गत आने वाला हिंदू कॉलेज देश के सबसे पुराने व सम्मानित शक्षिक संस्थानों में शामिल है। इसमें अंडरग्रेजुएट, पीजी दोनों ही तरह के कोर्स ऑफर किए जाते हैं। पिछले कई सालों से लगातार इस कॉलेज की गिनती देश के शीर्ष एकेडमिक इंस्टीट्यूट्स में हो रही है।
स्थापना-1899
प्रमुख कोर्स-साइंस, कॉमर्स, ह्यूमेनटीज
लोयोला कॉलेज, चेन्नई- मद्रास यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाला लोयोला कॉलेज स्वायत्त संस्थान है। इस कॉलेज में बेहतरीन डिग्री कोर्स हैं। कोर्स की खासियत की बदौलत यहां देश ही नहीं विदेश से भी छात्र इसकी ओर खिंचे चले आते हैं।
स्थापना-1925
प्रमुख कोर्स- कॉमर्स, आ‌र्ट्स, नेचुरल सांइस, सोशल साइंस, लिबरल सांइस
सेंट स्टीफेंस कॉलेज, नई दिल्ली- आज की तारीख में स्टीफेनियन किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। यह टर्म सेंट स्टीफेंस कॉलेज के छात्रों व पूर्व छात्र समुदाय के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आपको यहां से पास आउट ऐसे सैकडों स्टूडेंट्स मिल जाएंगे, जो अपने-अपने क्षेत्रों में सेलीब्रेटी का मुकाम रखते हैं। यह कालेज डीयू के नॉर्थ कैंपस में आता है।
स्थापना-1881
प्रमुख कोर्स- साइंस, लिबरल आर्ट (पीजी, यूजी)
प्रेसीडेंसी कॉलेज- राजा राम मोहन द्वारा स्थापित यह कॉलेज देश में नव सुधारों की दिशा में बहुत बडा कदम माना जाता है। आजादी पूर्व देश में स्वतंत्र विचार मंथन का श्चोत रहा यह कॉलेज आज युवा कॅरियर को ऊंची परवाज दे रहा है। अपनी स्थापना के समय इसे हिंदू कॉलेज के नाम से जाना जाता था।
स्थापना वर्ष- 1818
प्रमुख कोर्स- बीएससी(इकोनॉमिक्स), साइंस, नेचुरल सांइस, लैंग्वेज
जेआरसी टीम

आप भी बन सकते हैं अगले टॉपर




आठ अप्रैल को हुई इस परीक्षा में देश भर के लाखों परीक्षार्थियों ने भाग्य आजमाया था। शुक्रवार को परिणाम घोषित किया गया। पिछले वर्ष की तुलना में स्टूडेंट्स को अंक देने का पैटर्न और पूछे जानेवाले सवालों का ट्रेंड कुछ बदला हुआ दिखा। इसका असर ओवरऑल मेरिट पर भी पडा। इस वर्ष आइआइटी-जेईई 2012 में 4,79,651 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा में हिस्सा लिया। देश भर के17आइआइटी संस्थान छात्र-छात्राओं को काउंसिलिंग के लिए आमंत्रित करेंगे। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में चार हजार अधिक है। इस बार परीक्षा की खासियत यह रही कि समाज के हर वर्ग के मेधावियों ने मेरिट में जगह बनाई। पहली बार बेहद गरीब वर्ग के बच्चों के सफल होने का ग्राफ हर बार की अपेक्षा इस बार ऊंचा रहा। इनमें किसी के पिता ईट-गारा उठाकर परिवार चलाते हैं, तो किसी के पिता घरों की रंगाई-पुताई करके जीवन यापन कर रहे हैं। इस परीक्षा में जो भी चुना गया, उसकी अपनी प्रेरक दास्तां है। आइआइटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2012 में फरीदाबाद के अर्पित अग्रवाल ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। दूसरे स्थान पर आइआइटी रुडकी जोन के बीजॉय सिंह कोचर तथा तीसरे स्थान पर आइआइटी खडगपुर जोन के निशांत एन कौशिक रहे। वहीं आइआइटी मद्रास जोन की इनाला जीवन प्रिया ने लडकियों के वर्ग में प्रथम स्थान हासिल किया है।
जहां खाने को तरसते थे, वहां के लाल ने किया कमाल
इस बार के रिजल्ट परिणामों से यह देखने को मिला कि मेधा और प्रतिभा सभी में होती है, बशर्ते अनगढ पत्थर को सलीके से तराशा जाए। सफल स्टूडेंट्स को देखकर कहा जा सकता है कि कैसी भी परिस्थिति हों, अगर प्रतिभा है, तो आइआइटी जैसी कठिन परीक्षा में भी सफलता मिल सकती है। 245 वीं रैंक सिद्धार्थ के पिता मंशा राम ने घरों में पुताई कर अपने बेटे को पढाया, तो वहीं लाचार पिता और भाई का सहारा बनी इंदू ने प्राइवेट स्कूल में पढाकर अपने भाई हिमांशू को आइआइटियन बनाकर दम लिया। अंकुर की कहानी भी इसी तरह की है। अंकुर के पिता के देहांत के बाद लग रहा था जैसे बच्चों की पढाई बंद करनी पडेगी। लेकिन मां ने आशा नहीं छोडी, फिर हिम्मत संजोई और बेटे का हौसला बढाया। परिणाम सबके सामने है कि आज अंकुर आइआइटी-जेईई की मेरिट में है। इसी तरह 839 रैंक लानेवाले राहुल गौतम के पिता भी एक छोटे से मकान में रहते हैं,मजदूरी करके किसी तरह अपना पेट पालते हैं। लेकिन दाद दीजिए उनके अरमानों की जो अपने बेटे को आइआइटी में जगह दिलाकर ही माने। कहने का आशय यह है कि यदि आपमें प्रतिभा है तो यहां सफलता आपमें और उसमें फर्क नहीं करेगी। यह उसी को मिलेगी, जो बेहतर होगा।
रेगुलर पढाई है मंत्र
अपनी सफलता का सारा श्रेय परिवार को देने के बाद अर्पित कहता है कि सफलता के लिए नियमबद्ध होकर पढना बहुत जरूरी है। कोचिंग छात्रों का मार्गदर्शन करती है, लेकिन सफलता मेहनत और लगन से मिलती है।
सफलता के लिए हर विषय की कमजोर कडी को दूर करने और हर विषय पर नियंत्रण के लिए पढाई के समय को ऐसे बांटे कि सभी विषयों को पढने का बराबर समय मिले। अपना अनुभव बताते हुए अर्पित कहते हैं कि उसने लगातार चार घंटे तक कभी पढाई नहीं की। वह रिलैक्स होकर पढता था। देशभर में सातवां स्थान हासिल करने वाले अनंत गुप्ता ने कहा मैं माता पिता व टीचर को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने मुझे आगे बढाया है।
अनंत ने कहा मैं रोजाना 4 से 5 घंटे अध्ययन करता था। मेरा मानना है कि स्टडी तो जरूरी है,लेकिन उसके साथ क्वालिटी स्टडी और भी जरूरी है। भले ही आप 3-4 घंटे पढें, लेकिल फुल कंसंट्रेशन जरूरी है।
बढाएं प्रॉब्लम सॉल्विंग कैपिसिटी
अभी अर्पित को बारहवीं के रिजल्ट का इंतजार है, लेकिन वह आइआइटी टॉपर बन चुका है। खुशी उसके चेहरे से साफ झलक रही है। कईसंस्थानइसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन जैसी परीक्षा की प्रिपरेशन कराते हैं। इस परीक्षा के माध्यम से स्टूडेंट्स की तैयारी और समझ काफी विकसित हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैसे तो स्टूडेंट्स को छठी क्लास से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, लेकिन इस समय स्टूडेंट्स की अपेक्षा गार्जियन और टीचर को अधिक मेहनत की जरूरत होती है। इस समय स्टूडेंट्स की पढाई इस तरह की होनी चाहिए, जिससे वह किसी भी चीज को अलग तरीके से सोच सके। उदाहरण के लिए यदि मैथ्स का प्रश्न है, तो उसे सॉल्व करने के लिए फार्मूले खोजने चाहिए। इस वर्ग केस्टूडेंट्स की तैयारी का मुख्य मकसद आइआइटी-जेइइ के मार्फत एनटीएसई की तैयारी पर फोकस होता है।
किसी भी प्रॉब्लम को एनालिटिकल तरीके से सोचने और प्रॉब्लम सॉल्विंग कैपिसिटी का रुझान इस समय काफी महत्वपूर्ण होता है। इस परीक्षा में सफल हुए स्टूडेंट्स भी मानते हैं कि भले ही आइआइटी-जेईई की गंभीर तैयारी ग्यारहवीं के बाद होती है, लेकिन ओलंपियाड, एनटीएसई इस परीक्षा की तैयारी में अपको काफी मदद देते हैं। वहीं नवीं, दसवीं की एनसीईआरटी पुस्तकों से पीसीएम से संबंधित सवाल हल करना भी इस दौरान उतना ही फायदेमंद है। इन सब चीजों से स्टूडेंट्स में वे गुण विकसित हो जाते हैं, जो परीक्षा की बाधादौड में अतिरिक्त गति देते हैं।
एक साथ करें बोर्ड और जेईई की तैयारी
यह समय परीक्षार्थी के लिए सबसे क्रूशियल होता है, क्योंकि स्टूडेंट्स को एक साथ दो तरह की परीक्षा देनी पडती हैं। पहली और सबसे अहम परीक्षा बारहवीं बोर्ड की होती है, जिसमें कम से कम प्रथम श्रेणी से पास करना ही होता है। वहीं उन्हें आइआइटी की परीक्षा भी देनी पडती है। दोनों परीक्षाओं की अलग तैयारी संभव नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आइआइटी-जेईई सिलेबस बोर्ड और कम्पीटिशन के सिलेबस को मर्ज करके तैयार किया गया हैलिहाजा इसमें दोनों ही फ्रंट्स पर एक साथ संघर्ष करना होगा।
टॉपर्स टॉक
मार्गदर्शन और सही स्ट्रेटेजी से मिली सफलता
पहले ही अटैम्प्ट में आइआइटी-जेईई परीक्षा में फ‌र्स्ट रैंक पाने वाले अर्पित का कहना है कि यदि चार से पांच घंटे प्रतिदिन पढाई कर ली जाए, तो कामयाबी सहज हो सकती है। खुद उन्होंने ग्यारहवीं में पहुंचते ही आइआइटी-जेईई के लिए स्ट्रेटेजी बना ली थी। उसी के अनुरूप मात्र 4 से 5 घंटे की प्रतिदिन पढाई ने यह सम्मान दिलाया है। अर्पित कहते हैं कि आइआइटी उनका बचपन का सपना था। पापा ने हौंसला बढाया, मम्मी से आशीर्वाद मिला और बहन के सहयोग से मैंने आज इसे प्राप्त कर ही लिया। अब आगे मैं कंप्यूटर इंजीनियर बनने की तमन्ना को पूरा करना चाहता हूं। परीक्षा मे ंपेश आई मुश्किलों के बारे में अर्पित का कहना है कि मैंने फीजिक्स पेपर के दो सवाल गलत मार्क कर दिए थे। उसे ठीक भी नहीं कर सकता था, क्योंकि इस वर्ष पहली बार उत्तर पुस्तिका पर मार्किंग बॉल पेन से की जा रही थी। उसके बाद लग रहा था कि टॉपर बनने का चांस बहुत कम है। लेकिन किस्मत मेरे साथ थी और मैं टॉप कर गया। गाइडेंस के बारे में वह सुझाव देते हैं कि मार्गदर्शन बहुत जरूरी है। वह चाहें घर में बडे भाई के रूप में हो या फिर सीनियर्स या किसी कोचिंग संस्थान के रूप में। लिहाजा आवश्यक हैकि किसी भी स्तर पर मिल रहे सुझावों को नजरंदाज न किया जाए ।
अर्पित अग्रवाल, आइआइटी-जेईई, 1 रैंक
कामयाबी शार्टकट से नहीं मिलती
देशभर में दूसरा स्थान हासिल करने वाले बिजॉय सिंह कोचड के पिता डॉ. एपी सिंह पेशे से मनोचिकित्सक हैं। बेटे की कामयाबी पर उनका कहना है कि मैंने बिजॉय की सफलता की आस तो जरुर लगाई थी, इतनी बडी कामयाबी मिलेगी, इसका अंदाजा नहीं था। सभी माता-पिता चाहते हैं उनके लाडले कामयाबी की मंजिले तय करें मगर यह उन की मेहनत और लगन पर निर्भर करता है कि बच्चा किन ऊचांइयों को छुएगा। मैंने बिजॉय को हार में भी कभी टूटने नहीं दिया। बिजॉय के टीचर्स ने भी उसे सही दिशा की ओर मोडा। इन्हीं सब चीजों का नतीजा इस अद्भूत सफलता के रूप में मिला है। फोन पर हुई बातचीत में बिजॉय का कहना था कि मैं अपनी कामयाबी के लिए पेरेंट्स, टीचर और ईश्वर का धन्यवाद देना चाहता हूं। साथ ही इस आगामी आइआइटी-जेईई की तैयारी मे लगे स्टूडेंट्स को संदेश देते हुए कहते हैं कि मेहनत तो सभी करते हैं, लेकिन अंत तक जूझने, लडने की क्षमता रखने वालों को ही जीत नसीब होती है। इसलिए कठिन परिश्रम से न घबराएं, विजेता कभी शॉर्टकट के मोहताज नहीं होते। बिजॉय सिंह कोचर (2 रैंक )
नियमित पढाई ने दिलाई सफलता
अंनंत मानते हैं कि अगर मन लगाकर नियमित पढाई की जाए, तो आइआइटी जेईई में सफलता हासिल की जा सकती है। इसमें सफल होने के लिए किताबी कीडा बनने की जरूरत नहीं है। जरूरत है, तो सिर्फ टू दी प्वाइंट पढाई की। ज्यादा कठिन परिश्रम काम आता है। लिहाजा तैयारी में स्टडी के साथ स्मार्ट स्टडी को भी अप्लाई करें। अनंत के पिता राजपुरा में एमबीबीएस राजीव गुप्ता व माता एमबीबीएस सीमा गुप्ता ने बेटे की कामयाबी के लिए उसकी मेहनत, ईश्वर और टीचर को श्रेय दिया। अनंत ने कहा कि मेरा कंप्यूटर के क्षेत्र में आगे बढने का लक्ष्य है।
अनंत गुप्ता (7 रैंक )
भरोसा ऑथेंटिक बुक्स पर
जेईई पेपर के सवालों की एनालिसिस और घोषित परिणाम की समीक्षा करने पर ऐसा लगता है कि जिन छात्रों ने सब्जेक्ट्स के अच्छे लेखकों की किताबों से पूरे ईमानदारी से पढाई की है, उनका रिजल्ट बेहतर आया है। आइआइटी की प्रवेश परीक्षा मेंसफलता पाने वाले बिजॉय सिंह कोचड व अनंत गुप्ता का मानना है कि सही मार्गदर्शन के साथ अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करने से लाभ मिलता है। लगभग दोनों विद्यार्थियों ने एक ही बात कही कि एनसीईआरटी की पुस्तकों के अलावा हर विषय की एक प्रामाणिक पुस्तक का बार-बार अध्ययन करना आइआइटी जैसी परीक्षा के लिए लाभप्रद है।
आखिर क्यों है क्रेज
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के बढते क्रेज का प्रमुख कारण है आइआइटियन का सुपर ब्रेन। यहां से पास आउट प्रतिभाएं सुपर ब्रेन की श्रेणी में आती हैं। कई आइआइटी संस्थान विदेशों के प्रमुख विश्वविद्यालयों से जुडे होते हैं। इसी कारण आइआइटी-जेईई एग्जाम में वही सफल होता है, जो वाकई एक्स्ट्राओर्डिनरी होता है। यहां से निकलने वाले स्टूडेंट्स आइआइएम और आईएएस की परीक्षा में काफी संख्या में सफल होते हैं। आइआइटी में रुझान का पता सातवीं क्लास से लगाया जा सकता है।
(जेआरसी टीम के साथ ओजस्कर पांडेय)
>जेआरसी टीम

आईएएस मेन्स सेमीफाइनल की सटीक तैयारी




आईएएस बनने का सपना सभी स्टूडेंट्स देखते हैं, लेकिन तैयारी के बावजूद इस परीक्षा में चंद लोग ही सफल हो पाते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि तमाम ग्लैरमस कॅरियर के बीच आज भी अधिकांश युवकों का सपना आईएएस, आईपीएस या आईएफएस बनने का होता है। अगर पिछली परीक्षा के टॉप टेन में शामिल अभ्यर्थियों को देखें, तो अधिकांश अभ्यर्थी अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं, लेकिन इसके बावजूद वे भी इस क्षेत्र के क्रेज से बच नहीं पाए। सभी क्षेत्रों के लोगों के आने से यह परीक्षा अत्यंत कठिन हो जाती है। अगर आप भी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं और मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं, तो आपके लिए अब बहुत कम समय बचा है। परीक्षा 5 अक्टूबर से शुरू है। अगर इस बचे हुए समय का सही सदुपयोग करते हैं, तो आपकी तैयारी औरों से अलग हो सकती है और बेहतर प्रदर्शन करके कामयाबी की नई इबारत लिख सकते हैं।
हर पल है महत्वपूर्ण
इस परीक्षा में सफल स्टूडेंट्स का मानना है कि मुख्य परीक्षा में आप प्रभावी प्रदर्शन तभी कर पाएंगे, जब बचे हुए समय का सही सदुपयोग करेंगे। इस समय नए टॉपिक्स पढने से बचें और जो अभी तक पढे हैं, उसका खूब रीविजन करें। रीविजन ही सफलता की कुंजी है। इसके अलावा आप सबसे पहले इस परीक्षा में पूछे जानेवाले विषयों की एक सूची बना लें और अपनी तैयारी की योजना इसी के अनुरूप करें। अगर आपको लगता है कि आपके जीएस पेपर में कुछ कमी रह गई है, जिसे दो दिनों में कंप्लीट किया जा सकता है, तो आपके लिए बेहतर होगा कि आप सबसे पहले जीएस पेपर की तैयारी में जुट जाएं। उसके बाद ही अन्य पेपर पर ध्यान दें। इस तरह की योजना आपको खुद बनानी होगी और खुद उस पर अमल भी करना होगा। अगर आप इस तरह की योजना हर विषय के साथ बनाते हैं, तो आप अपने बचे हुए समय का सही सदुपयोग करने में सफल हो सकते हैं।
गैप को ध्यान में रखकर करें तैयारी
सफल लोग कोई अलग काम नहीं करते हैं, बल्कि हर काम अलग ढंग से करते हैं। अगर आपको मुख्य परीक्षा में बेहतर स्कोर करना है, तो आपको भीड से अलग होने के लिए कुछ अलग सोचना होगा। आप सबसे पहले यह देखें कि आपका ऑप्शनल विषय कब है। अक्सर देखा जाता है कि दो ऑप्शनल विषयों के बीच काफी दिनों का गैप होता है। अगर आपके साथ भी इस तरह की स्थिति है, तो बेहतर होगा कि आप अपने विषयों की तैयारी इस बचे हुए समय के लिए रख दें और इस बचे हुए समय का सदुपयोग अन्य कमजोर विषयों के रीविजन करें। इससे आपको अन्य विषयों की तैयारी के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
समय प्रबंधन है अहम
सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा में अपनी सफलता सुनिश्चित करनी है, तो सभी प्रश्नपत्रों पर बराबर ध्यान दें। ऐसा न हो कि एक पेपर पर आप खूब मेहनत करें और दूसरे पर कम ध्यान दें। यदि आप सभी प्रश्नपत्रों में अधिकाधिक अंक हासिल करेंगे, तो सिविल सेवा में आपका चयन काफी हद तक सुनिश्चित हो जाएगा। मुख्य परीक्षा के कुल 2000 अंकों में से यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसमें से कितने अंक बटोर पाते हैं। आप मुख्य परीक्षा में जितने ज्यादा अंक पाएंगे, उससे न केवल इस परीक्षा में आपकी सफलता पक्की होगी, बल्कि आप मेरिट लिस्ट में ऊपरी स्थान पाकर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या समकक्ष कैडर के अधिकारी बन सकेंगे।
अनिवार्य विषय पर दें ध्यान
आईएएस की तैयारी करनेवाले अधिकांश अभ्यर्थी जनरल इंग्लिश और सामान्य हिंदी की तैयारी के प्रति गंभीर नहीं होते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि बाद में उन्हें अनेक तरह की परेशानियों का सामना करना पडता है और समयाभाव के कारण अंतिम समय में अपनी रणनीति और भाग्य को कोसते हैं। यूपीएससी की परीक्षा में सभी विषयों का समान महत्व होता है। आप किसी भी विषय को छोडकर आगे नहीं बढ सकते हैं। यदि आप इसमें क्वालीफाइंग मा‌र्क्स लाने में सफल होंगे, तभी अन्य विषयों का मूल्यांकन किया जाएगा। इस कारण इसे हल्के में लेने की भूल कभी न करें। आपके लिए सबसे बेहतर रास्ता यह है कि क्वालीफाइंग नेचर के जनरल इंग्लिश और सामान्य हिन्दी के प्रति कतई लापरवाही न बरतें और इसकी भी तैयारी अच्छी तरह से करें।
साइंटिफिक सोच जरूरी
मुख्य परीक्षा में सफल कई टॉपर्स का मानना है कि कुछ स्टूडेंट्स यह सोचते हैं कि निबंध में थोडी तैयारी करके अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। इस तरह की बातें ठीक नहीं हैं। निबंध में आप बेहतर अंक तभी ला सकते हैं, जब आप साइंटिफिक तरीके से इसकी तैयारी करते हैं। ल्ल फोकस्ड हैं तो बेहतर है- बेहतर और आदर्श स्थिति यह होगी कि पहले से ही एक क्षेत्र निर्धारित कर लें कि मुझे इन्हीं क्षेत्रों से रिलेटेड प्रश्नों का उत्तर लिखना है। उदाहरण के लिए यदि आप पहले से यह निर्धारित कर लेते हैं कि मुझे राजनीति से संबंधित क्षेत्रों पर ही निबंध लिखना है, तो आपके लिए बेहतर स्थिति होगी और आप तैयारी को भी अंतिम रूप देने में सफल होंगे। ल्ल घडी पर रखें नजर- इस परीक्षा में निबंध का एक अनिवार्य पेपर होता है, जिसमें तीन घंटे में किसी एक विषय पर निबंध लिखना होता है। इस समय में आप सूझ-बूझ के साथ व्यवस्थित और तर्कपूर्ण ढंग से लिखें।
प्रैक्टिस का नहीं है?
जोड- इस पेपर का मकसद आपकी सोच, भाषा-शैली और सहज अभिव्यक्ति क्षमता को परखना होता है। इसके लिए खूब प्रैक्टिस करें। इसके अतिरिक्त यदि आपके आस-पास कोई ऐसा मित्र या परिचित है, जो इस परीक्षा में पहले सफलता हासिल कर चुका है, तो उससे मशविरा लेकर तैयारी की स्ट्रेटेजी बना सकते हैं।
चुनें क्वालिटी स्टडी मैटीरियल- आप अपने विषय से संबंधित टॉपिक्स भी पढ सकते हैं और महत्वपूर्ण टॉपिक्स को नोट भी कर सकते हैं। इन दिनों बाजार में सिविल सेवा की परीक्षा से संबंधित कई मैग्जीन्स आ रही हैं, जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के लेख छपे होते हैं। आप इसे अवश्य पढें और खुद को हमेशा अपडेट करते रहें।
लेखन क्षमता से बनेगी बात- आईएएस परीक्षा की तैयारी में लगे छात्रों की एक आम समस्या होती है कि वे पढते तो खूब हैं, लेकिन लेखन अभ्यास में कमी के चलते निबंध जैसे प्रश्नपत्रों में खासी मुश्किलों का सामना करते हैं। लिहाजा उन्हें विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लगातार लिखने का अभ्यास करें। अपने विचारों के उतावलेपन को संतुलन की बाढ में बांधने के लिए किया गया यह लेखन अभ्यास बहुत काम आएगा। इसके अलावा माना भी जाता है?कि निबंध लेखन एक अनवरत प्रक्रिया है?इसमें आपकी शली, भाषा पर पकड, नजरिया, तथ्य व उनके श्चोत सभी की जांच की जाती है। अतएव अभी से इन चीजों पर नियंत्रण के लिए अभ्यास शुरू कर दें।
सभी विषयों में चुनें कोर एरिया
इस परीक्षा में सफल सभी स्टूडेंट्स का यही मानना है कि आप इस परीक्षा में सफलता तभी प्राप्त कर सकते हैं, जब आप सिलेबस के अनुरूप पूरी तैयारी करेंगे।
तय करें प्राथमिकताएं- आईएएस परीक्षा में अब बहुत कम वक्त बचा है। इस बचे हुए समय में पूरे सिलेबस की तैयारी संभव नहीं है। इसलिए बेहतर तैयारी करने की रणनीति यही है कि आप इस समय उन्हीं क्षेत्रों, टॉपिक्स अथवा अध्यायों पर फोकस करें, जिससे पिछले पांच वषरें में सर्वाधिक प्रश्न पूछे जा रहे हैं।
नोट्स पर करें भरोसा- कम समय में पुख्ता तैयारी का सबसे अच्छा जरिया आपके बनाए नोट्स होते हैं। यह हम नहीं बल्कि विशेषज्ञ कहते हैं। इस लिहाज से तैयारी के इस मोड पर बेहतर होगा कि आप किताबों के ढेर में उलझने के बजाय साल भर की मेहनत से तैयार किए गए नोट्स पर ध्यान दें।
लास्ट मिनिट्स टच है महत्वपूर्ण- आप कितना ही अध्ययन क्यों न कर लें, लेकिन आईएएस जैसे विषद पाठ्यक्रम में अंतिम समय में कुछ न कुछ महत्वपूर्ण छूट ही जाता है। लिहाजा अच्छा होगा कि आप तैयारी को अंतिम रूप देते समय कुछ बैकअप टाइम भी रखें। इस समय का उपयोग आप सरसरी तौर पर अब तक छूट रहीं चीजों पर निगाह डालने के लिए कर सकते हैं।
कायदे मुख्य परीक्षा के
मुख्य परीक्षा निबंधात्मक प्रकृति की परीक्षा है, जिसमें अनिवार्य और वैकल्पिक विषय मिलाकर कुल नौ विषयों की परीक्षा देनी होती है। सामान्य हिन्दी (या कोई अन्य भारतीय भाषा) और सामान्य अंग्रेजी के अनिवार्य पेपर (दोनों 300-300 अंक के) केवल क्वालीफाइंग नेचर के होते हैं, यानी इसमें केवल आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक पाना होता है। इसके अंक मेरिट लिस्ट बनाते समय नहीं जोडे जाते। इसके बाद अनिवार्य विषय के तहत निबंध का प्रश्नपत्र (200 अंक का) और सामान्य अध्ययन के दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक 300 अंक का) तथा अभ्यर्थी द्वारा चुने गए दो वैकल्पिक विषयों के दो-दो प्रश्नपत्र (प्रत्येक प्रश्नपत्र 300 अंक का) शामिल होते हैं।
उत्तर लिखने का करें अभ्यास
इस परीक्षा में असफल होनेवाले स्टूडेंट्स की मानें तो आपकी तैयारी अगर अच्छी है, लेकिन आपने लिखने की प्रैक्टिस नहीं की है, तो विषय की अच्छी जानकारी होने के बावजूद सफलता नहीं मिल सकती है।
तथ्य परक उत्तरों से ही मिलेंगे अंक
इस परीक्षा में बेहतर और सटीक उत्तर लिखने पर ही मा‌र्क्स दिए जाते हैं। मुख्य परीक्षा की प्रकृति निबंधात्मक होती है। इसमें जीएस और ऑप्शनल पेपर के आंसर निर्धारित शब्दों में लिखने होते हैं, इसलिए यहां पन्ना भरू शली से बचें।
शब्द सीमा का रखें ख्याल
जो उत्तर जितने शब्दों में मांगे जा रहे हैं, उसे उतनी ही शब्दों में टू दी प्वाइंट लिखने का अभ्यास अभी से करें। कुछ स्टूडेंट्स इसका पालन नहीं करते हैं, उसके साथ समस्या यह होती है कि अधिक उत्तर लिखने के सिलसिले में वह अन्य प्रश्नों को जानकर भी समयाभाव के कारण नहीं लिख पाते हैं।
गत प्रश्न पत्रों को बनाएं आधार
चयनात्मक अध्ययन के लिए पिछले वर्षो के प्रश्नपत्रों के आधार पर अपने ऑप्शनल विषयों के प्रश्न गेस करें और उनके आदर्श उत्तर तैयार करें। परीक्षा में एक प्रश्न से जुडे उप-प्रश्न भी होते हैं, इसलिए गेस किए गए प्रश्नों के उत्तर तैयार करते समय इससे संबंधित सभी पहलुओं का भी ध्यान रखें।
लिखें संतुलित
याद रखिए आईएएस परीक्षा में लिखे गए आपके हर शब्द से आपकी विचारधारा, व्यक्तित्व का पता चलता है। ऐसे में किसी खास नीति, पक्ष की ओर दिखाया गया झुकाव आपके लिए यहां घातक साबित हो सकता है। इसलिए उत्तर लिखने में संतुलित दृष्टि अपनाएं और अपने लिखे हुए हर शब्द की कीमत पहचानें।
आईएएस ही क्यों?
कॅरियर कई हैं, लेकिन प्रशासनिक सेवा की बात ही कुछ और है। देश सेवा, व्यवस्था परिवर्तन क कुंजी, रुतबा कुछ ऐसी चीजें हैं, जो भारतीय प्रशासनिक सेवाओं को भविष्य के दूसरे विकल्पों से बहुत आगे रखती हैं..
आखिर क्या बात है भारतीय प्रशासनिक सेवा में कि सालों बाद भी उसके लिए युवाओं की ललक जस की तस है। ऐसा नहीं है कि इन युवाओं के पास चमचमाते विकल्पों या फिर बेहतर सेलरी वाले कॅरियर्स की कमी है। बावजूद इसकेवे इन चमचमाती च्वाइसेज को प्रशासनिक सेवाओं के लिए दरकिनार कर रहे हैं। आज देश के कोने-कोने में सालों, दिन रात एक करके परीक्षा की तैयार करते युवा आईएएस की लोकप्रियता की कहानी कहते हैं।
पहचान बनाने का मौका- आज हर आदमी खुद की पहचान बनाने में लगा है। इसके लिए वे अपने स्तर पर प्रयास भी करते हैं और इस जद्दोजहद में दूसरों से कुछ हटकर करने क कोशिश में वे अपनी पहचान बना भी लेते हैं लेकिन कम ही होता है कि उनकी पहचान देश में बदलावों से जोडकर देखी जाती है। आईएएस परीक्षा एक ऐसा ही माध्यम है? जो आपको अलग पहचान बनाने के साथ देश में परिवर्तनों का वाहक बनने का अवसर भी देती है।
प्राइवेट सेक्टर से है अलहदा- तमाम विकल्पों के बीच आज भी इस क्षेत्र का रुतबा कुछ ऐसा है कि हर साल लाखों छात्र यहां खुद को आजमाते हैं। वे विफल हो या सफल हो यह अलग मुद्दा है? लेकिन परीक्षा में उनकी बडे स्तर पर हिस्सेदारी सिविल सर्विस के महत्व को बयां करने के लिए काफी है।
राष्ट्र निर्माण में अगुआ- स्वयं संविधान, आदर्श प्रशासन की संकल्पना में सिविल सर्विस के महत्व को रेखांकित करते हुए देश की पोर-पोर में व्यवस्था बहाली की कुंजी प्रशासनिक अधिकारियों को देता है। विकास की कोई भी परियोजना हो, जनकल्याण का कैसा भी मसौदा हो, प्राकृतिक आपदा के कितने भी कठिन क्षण हों, पहली प्रतिक्रिया प्रशासन की ओर से ही आती है। ऐसे में कहा जाए कि देश के विकास के ककहरे की शुरुआत सक्षम प्रशासन से होती है तो अतिशयोक्ति नहीं है।
मिलेगा आत्मसंतोष- आपने अपने बचपन में अपने आस-पास मुसीबतग्रस्त लोगों को देखा होगा। कई बार आपका दिल भी उनके दर्द को देखकर भर आया होगा। पर सवाल यही बाकी रहा कि उनकी दिक्कतें दूर कैसे की जाएं? भारतीय प्रशासनिक सेवा अब तक आपके मन के कोने में पल रहे इस प्रश्न का वाजिब हल है। यहां काम करते हुए आप अपने समूचे अधिकारों का इस्तेमाल देशवासियों के कष्ट, उनकी रोजाना की परेशानियों को हल करने में कर सकते हैं। यहां अपने काम से मिले संतोष का कोई?मुकाबला नहीं है।
जेआरसी टीम