Wednesday, 14 August 2013

Ethical Hacking

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9/11 की घटना के बाद अलकायदा की ओर से भेजे गए एक गुप्त कोड को तोडकर उसे समझने वाला केवल एक शख्स था। एथिकल हैकर अंकित फडिया। केवल सोलह साल की उम्र में अंकित फडिया ने कोडेड संदेश को तोडकर दिखा दिया कि हिंदुस्तानी भी कहीं कम नहीं है। उसके बाद से हर बडी आतंकी घटनाएं होने पर साइबर स्थिति को समझने के लिए अंकित को याद किया जाता है। अंकित ने आतंकवाद और साइबर अपराध से जुडी कई समस्याओं को सुलझाया है। साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट अंकित खुद को एक एथिकल हैकर कहलाना पसंद करते हैं। अंकित इन दिनों कंप्यूटर सिक्योरिटी से जुडी एक कंपनी के निजी सलाहकार हैं। अंकित ने व्यापक रूप में साइबर अपराध और आतंकवादी गतिविधियों की पोल खोलने के जो कार्य किए हैं, वे खासे सराहनीय हंै। 24 वर्षीय अंकित की स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल में हुई। बाद में इन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया। माता पिता से उपहार में प्राप्त कंप्यूटर पर अंकित ने स्कूल के दौरान ही हैकिंग के गुर सीखने शुरू कर दिए थे। जल्द ही वे इसके विशेषज्ञ बन गए। महज तेरह साल की उम्र में अंकित ने एक मैगजीन की वेबसाइट को हैक कर लिया। शायद उन्हें इस काम के लिए जेल जाना पडता, लेकिन मैगजीन के संपादक को उन्होंने ई मेल करके बताया की उनकी वेबसाइट कितनी असुरक्षित है और इसकी सुरक्षा के लिए कैसे कदम उठाने चाहिए। यह उनके जीवन की पहली हैकिंग थी। अंकित ने पिछले तीन वर्षो में लगभग बीस हजार लोगों को एथिकल हैकिंग की ट्रेनिंग दी है। यही नहीं इन्होंने 'हैकिंग ट्रूथ' के नाम से एक वेबसाइट भी शुरू की है, जिसे एफबीआई ने दुनिया की दूसरी सबसे बेहतरीन वेबसाइट माना है। हैकिंग पर अंकित ने अब तक तेरह किताबें लिखी है। चौदह वर्ष की आयु में लिखी 'द अनऑफिशियल गाइड टू एथिकल हैकिंग' की दुनिया में तीन लाख प्रतियां बिकी। इस बेस्ट सेलर बुक का ग्यारह भाषाओं में अनुवाद भी किया गया है। वे 25 से ज्यादा देशों में लगभग1000 सेमीनार में हिस्सा ले चुके हैं। लगभग तीस से भी ज्यादा अवार्ड इनके खाते में है। इन सब के साथ फडिया एक स्कूल भी चलाते हंै जो हैकिंग रोकने की ट्रेनिंग भी देता है। कह सकते हैं कि जब दुनिया इलेक्ट्रोनिक संग्राम में प्रवेश कर चुकी है तब अंकित फडिया जैसे टेक्नोसेवी युवा देश की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
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Ethical Hacking

 'हैकर' शब्द सुनते ही दिमाग में ऎसे शातिर की छवि बनती है, जो इंटरनेट की दुनिया में अपराध को अंजाम देता है। लेकिन कुछ ऎसे हैकर्स भी हैं, जो जुर्म के खिलाफ लड़ने में सरकार की मदद कर रहे हैं, यह सुनकर आप चौकेंगे जरूर । बात करें उन चुनिंदा युवाओं की, जो शातिर हैकर्स को मात देकर हमारी सुरक्षा कर रहे हैं।

            साइबर सुरक्षा का युवा बादशाह
भारत के सबसे लोकप्रिय एथिकल हैकर्स में से एक हंै अंकित फाडिया। 22 साल के अंकित ने एथिकल हैकिंग पर अपनी पहली किताब उस समय लिखी थी, जब वह महज 14 साल के थे और 10वीं क्लास में पढ़ते थे। अब तक वह 14 किताबें लिख चुके हैं और 15वीं लिख रहे हैं। अंकित की नजरों में एथिकल हैकिंग का मतलब है, 'अच्छे उद्देश्य के लिए किसी का कंप्यूटर हैक करना।'

 इसके जरिए सरकार की खुफिया एजेंसी की मदद की जा सकती है। बड़ी से बड़ी साजिश या आतंकी हमले की योजना का पर्दाफाश किया जा सकता है। साथ ही अपने तंत्र को इतना मजबूत किया जा सकता है कि हमारा अतिविश्वसनीय डाटा चोरी न हो सके। अपने 11 साल के कॅरिअर में वे कई केसों में सरकार और पुलिस की मदद कर चुके हैं। 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले और अहमदाबाद में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में सुराग इकट्ठा करने में भी अंकित ने काफी मदद की थी। अंकित के मुताबिक आज जिस तरह से सारी सेवाएं इंटरनेट के माध्यम से होती जा रही है, दिनों-दिन इंटरनेट, कंप्यूटर और मोबाइल का इस्तेमाल जोखिम देने लगा है, ऎसे में हैकिंग को लेकर लोगों में जागरूकता सबसे पहली जरूरत है। अंकित हैकिंग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अब तक 50 से ज्यादा देशों में घूम चुके हैं। 

उनका लैपटॉप, डाटा कार्ड और मोबाइल फोन ही उनका चलता फिरता ऑफिस है। एथिकल हैकिंग की शुरूआत अंकित ने सिर्फ अपने आप को दूसरों से बीस साबित करने के लिए की थी। मगर पहली किताब की सफलता के बाद अंकित ने अपने शौक को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। अंकित का यह भी मानना है कि एथिकल हैकिंग को कॅरिअर के तौर पर भी चुना जा सकता है क्योंकि पूरी दुनिया में साइबर सुरक्षा से जुड़े मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। आज हर किसी कंपनी, संगठन या देश को एथिकल हैकर्स की जरूरत है, जो उनके डाटा को हैकर्स से सुरक्षित रख सके।

 2009 में अंकित ने एमटीवी पर 'वॉट द हैक' कार्यक्रम भी शुरू किया, जिसमें उन्होंने दर्शकों को बताया कि कैसे इंटरनेट को अच्छे इस्तेमाल में भी लिया जा सकता है। इसके अलावा अंकित देश भर में हैकिंग के प्रति लोगों का नजरिया बदलने के लिए वर्कशॉप भी करते हैं। उनके काम से प्रभावित होकर सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी ने 'अंकित फाडिया स्टडी अवार्ड' भी शुरू कर रखा है। इसमें दुनिया के उन छात्रों को पुरस्कृत किया जाता है, जो सूचना और सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहे हों।  
         तंग गलियों को किया साहिल ने रोशन
पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में किराए के एक कमरे के मकान में रहता है साहिल खान। उम्र अभी बीस भी पार नहीं की है, लेकिन हैकिंग में उनका कोई मुकाबला नहीं। हैकिंग जैसे विषय पर चार से ज्यादा किताबें लिख चुके हैं जनाब। जब साहिल महज आठ साल के थे, तो स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्होंने स्कूल में कंप्यूटर विषय पर भाषण दिया, जिसे सुनकर दिल्ली के मंत्री हारून यूसुफ भी हैरान रह गए थे। साहिल पिता से चैटिंग करते हुए पहली बार कंप्यूटर की दुनिया से रूबरू हुए। इस दौरान आने वाले वायरस को वह खुद ही हटा दिया करते थे।

 धीरे-धीरे कंप्यूटर के प्रति उनका प्रेम बढ़ता चला गया। 13 साल की उम्र में साहिल ने हैकिंग पर अपनी पहली किताब लिखी। 'हैकर एंड क्रेकर' नाम की इस पुस्तक का विमोचन केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने किया। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि साहिल ने कभी भी कंप्यूटर की ट्रेनिंग नहीं ली है बल्कि उन्होंने यह कौशल अपने आप पैदा किया। 

पहली किताब की सफलता के बाद उन्होंने 'द एनाटॉमी ऑफ कंप्यूटर वायरस' नाम से दूसरी किताब लिखी। साहिल का मानना है कि भारतीय साइबर सिस्टम काफी कमजोर है और उस पर हमेशा हमले का खतरा बना रहता है। इसके लिए सलाहकार समिति में एथिकल हैकर या फिर 'वाइट हैट हैकर' को शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि वह ज्यादा बेहतर तरीके इस मामले को समझ सकते हैं। साहिल कहते हैं कि साइबर अपराधियों के कदम को एथिकल हैकर किसी भी सुरक्षा विशेषज्ञ से ज्यादा बेहतर समझ सकते हैं।
        'वाइट हैट' हैकर्स
इ नका नाम देश के बेहतरीन युवा एथिकल हैकर्स में श्ुामार है। 24 साल के राहुल त्यागी  पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले हैं। 2008 में उन्होंने 'राहुल त्यागी वाइट हैट' नाम से अपना एक ब्लॉग शुरू किया और उसके बाद उन्होंने एथिकल हैकिंग पर कई सारे आर्टिकल लिखे। वर्तमान में राहुल चंडीगढ़ की साइबर सुरक्षा कंपनी टीसीआईएल-आईटी में ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम कर रहे हैं। साइबर सिक्योरिटी एंड एंटी हैकिंग ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया में वह उपाध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं। न्यूजपेपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया से भी राहुल जुड़े हुए हैं। राहुल ने फेसबुक पर बहुत से नकली प्रोफाइल और फर्जी ईमेल आईडी की पहचान करने में भी काफी मदद की है। वे कहते हैं कि आज के दौर में हर वह इंसान, जो इंटरनेट से जुड़ा है, उसे हैकिंग के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है।

        छोटी उम्र बड़े काम
शा तनु, उम्र छोटी, लेकिन काम बड़े-बड़े। 10 साल की उम्र में ही शांतनु ने कई आई टी कंपनियों और सुरक्षा वेबसाइटों को अपनी सेवा देनी शुरू कर दी थी। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, वे बड़े से बड़े केस सुलझाने में लगे थे। संभवतया शांतनु भारत के सबसे कम उम्र के एथिकल हैकर हैं। वे मुंबई की आईटी सिक्यूरिटी प्रमाणपत्र कंपनी ओरचिडसेवन में सलाहकार भी हैं। वे अब तक 50 से ज्यादा औद्योगिक घरानों की वेबसाइट हैक कर उन्हें वायरस और अन्य खतरों से बचा चुके हंै। सातवीं क्लास में पढ़ने वाले शांतनु बड़े होकर साइबर कॉप बनना चाहते हंै, ताकि वे युवाओं को साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दे सकें। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम भी इस नन्हे सिपाही से काफी प्रभावित हुए। 2007 में कलाम शांतनु से मिले, तो उन्होंने कहा कि देश को आप जैसे लोगों की जरूरत है।

       वेबसाइट्स के युवा प्रहरी
वुप्पल विकास, फेसबुक के वाइट हैट यानि सोशल नेटवकिंüग वेबसाइट का प्रहरी ताकि कोई अवांछित हमला न कर सके। 19 साल के विकास का काम है कि ऎसे हैकर्स को फेसबुक से दूर रखना जो उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। 18 साल की उम्र में विकास ने एक पोर्टल तैयार किया, जो बेहतर सुरक्षा और हैकर्स से वेबसाइट को बचाए रखने के उपाय बताती है। एसआरएम यूनिवर्सिटी में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग भी किया जा रहा है। 

वे माइक्रोसॉफ्ट की सुरक्षा टीम में भी सदस्य हैं, जो कि सॉफ्टवेयर के ऑनलाइन खरीदने की प्रक्रिया की कमियों को दर्शाती है। ऑनलाइन शॉपिंग की लूपहॉल्स को भी पकड़ने में विकास कई कंपनियों की मदद कर चुके हैं। 14 साल की उम्र में ही वह हैदराबाद के सबसे युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन गए थे। उन्होंने ऑनलाइन शॉपिंग को सुरक्षित बनाने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया, जिसे आंध्र सरकार ने भी स्वीकार किया।

         'थर्ड आई' बन रही है 'हैल्पलाइन'
ना  म पारूल खन्ना, उम्र 19 साल। इस उम्र में ही पारूल साइबर सुरक्षा और एथिकल हैकिंग जैसे जटिल विषयों पर लैक्चर देते हैं। पारूल सुरक्षा एजेंसियों के अलावा कई एनजीओ, मल्टीनेशनल सिक्यूरिटी कंपनी, इंटेलिजेंस ब्यूरो और श्ौक्षिक संस्थानों से भी जुडे हुए हैं। देश से बाहर भी पारूल की धूम है। हांगकांग, दक्षिण चीन और मकाऊ जैसे देशों में भी वे साइबर सुरक्षा और एथिकल हैकिंग पर विशेष ट्रेनिंग सत्र का आयोजन कर चुके हैं। 

मोबाइल हैकिंग विषय पर पारूल मैनेजमेंट में शीर्ष स्तर के अधिकारी, बिजनेसमैन, तकनीकी विशेषज्ञ, सैन्यकर्मी और छात्रों को ट्रेनिंग दे चुके हैं। अब तक उन्होंने 5000 से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी है। साइबर सुरक्षा और हैकिंग पर भारत की पहली और एशिया की दूसरी मैगजीन हैकर्स मैगजीन की आधिकारिक कोर टीम के भी वे सदस्य हैं। यही नहीं 'थर्ड आई एथिकल हैकर्स यूनियन' के अध्यक्ष भी पारूल ही हैं। इसके अलावा भी न जाने कितने संगठनों के साथ मिलकर पारूल साइबर दुनिया पर नजर रखने का काम कर रहे हैं। समाज में इंटरनेट और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए पारूल ने 'थर्ड आई' का गठन किया।

 दिल्ली, मुंबई, गुजरात और हैदराबाद की पुलिस साइबर क्राइम के मुश्किल से मुश्किल केस को सुलझाने के लिए इसी थर्ड आई की मदद ले रही है। इसके अलावा कई मल्टीनेशनल बैंकों से भी पारूल जुड़े हुए हैं। पारूल का कहना है कि इन दिनों भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच एक तरह साइबर वार छिड़ा हुआ है। कुछ सिरफिरे खुद को देशभक्त बताकर ऎसे स्टंट करते हैं, जिससे वह प्रसिद्ध हो सकें, इसलिए इन्हें रोका जाना बेहद जरूरी है। इसके लिए एथिकल हैकर्स और सुरक्षा के मामलों से जुड़े विशेषज्ञों की फौज ही काम आ सकती है।
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एथिकल हैकर्स: साइबर-अपराध के चलते मांग बढ़ी

डिजीटल दौर में हैकर बुरी व्याधि के रूप में स्थापित है लेकिन इनके साथ एथिकल शब्द जुड़ते ही पूरी परिभाषा बदल जाती है। संदेह के घेरे से जुड़ी हैकिंग से विपरीत एथिकल हैकर कंपनियों,संस्थानों या लोगों से अनुमति लेकर साइबर सुरक्षा के लिए काम करते हैं। असल में सिक्योरिटी अब एक डायनेमिक इंडस्ट्री में बदल चुकी है  जहां एथिकल हैकिंग का बाजार पिछले कुछ सालों से उभर कर सामने आया है।
गौरतलब है कि हर साल राष्ट्रीय व अन्र्तराष्ट्रीय  वेबसाइट्स साइबर अपराधियों द्वारा हैक की जाती हैं। हाल ही में  याहू और लिंक्डहन की पासवर्ड चोरी साइबर अपराध का विश्वस्तरीय उदाहरण है। लेकिन इंडियन कम्प्यूटर  इमरजेंसी रिस्पोन्स टीम (सर्र-इन) के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष 800 से ज्यादा ‘डॉट इन’ वेबसाइट्स और करीबन 700 डॉट  कॉम वेबसाइट्स को नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे में कार्पोरेशन और सरकारी  संस्थानों का रुझान साइबर पेशेवरों की ओर हुआ है। कंसल्टिंग फर्म फ्रोस्ट एंड सुलिवन का अनुमान है कि वर्तमान में 21 प्रतिशत की दर से प्रगति कर रही यह इंडस्ट्री दुनियाभर में 2.28 मिलियन पेशेवरों को रोजगार उपलब्ध करा रही है और 2015 तक यह आंकड़ा 4.2 मिलियन पर पहुंच जायेगा। इंटरनेशनल डेटा कार्प के सर्वे के अनुसार दुनियाभर में 60,000 से ज्यादा इंफोर्मेशन सिक्योरिटी पेशेवरों की जरूरत है और  अगले कुछ सालों में वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 188000 होगा। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। नेसकॉम के अनुसार आने वाले सालों में भारत को हर साल 77,000 एथिकल हैकर्स की जरूरत होगी। वर्तमान में यह उत्पादन मात्र 15000 सालाना है। इसलिए करिअर के लिहाज से एथिकल हैकिंग में सुनहरा भविष्य है।
एथिकल हैकर क्या करते हैं? : एथिकल हैकर के काम में सिक्योरिटी प्रोटोकोल में प्रवेश के लिए हैकिंग टूल्ज का इस्तेमाल करना, नेटवर्क और वेबसाइट्स की सुरक्षा को जांचना व सुरक्षा उपायों को लागू करना शामिल है। सरल शब्दों में एथिकल हैकर्स नेटवक्र्स में प्रवेश करते हैं, सिक्योरिटी सिस्टम की कमजोरियों को पहचानते हैं और किसी नुकसान से पहले उसे ठीक कर देते हैं।
 उज्ज्वल भविष्य : कंपनियों की आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता  बढऩे से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी हुई है, बीएफएसआई, टेलीकॉम, आईटी सर्विसेज और ई कॉमर्स तेजी से एथिकल हैकर्स को नियुक्त कर रहे हैं। दूसरी अच्छी बात है कि आईटी के अन्य क्षेत्रों की तुलना में इन पेशेवरों का वेतन 20-30 प्रतिशत अधिक है, साथ ही  यहां उन्नति के अनेक अवसर भी उपलब्ध हैं। यहां नेटवर्क सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेटर, चीफ इंफोर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर या चीफ एप्लीकेशन सिक्योरिटी ऑफिसर के पद तक पहुंचा जा सकता है।
योग्यता: हैकिंग तकनीकों का ज्ञान और टूल्स को काम में लेने का अनुभव इस क्षेत्र में करिअर की शुरुआत के लिए जरूरी है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज जैसे सी,सी++ ,पर्ल, पायथन और रुबी में प्रोग्राम लिखने की योग्यता सबसे जरूरी है। असेंबली लैंग्वेज और विभिन्न  आपरेटिंग सिस्टम (माइक्रोसोफ्ट विंडोज, लाइनेक्स के विभिन्न वर्जन) की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। कंप्यूटर साइंस इन्फोर्मेशन टेक्नोलोजी के ग्रेजुएट्स/पोस्ट ग्रेजुएट्स और इंजीनियर एथिकल हैकिंग से जुड़े कोर्स कर सकते हैं।
अवसर : एथिकल हैकर्स के लिए बैकिंग व फायनेंस इंस्टीट्यूशन, एंश्योरेंश व इन्वेस्टमेंट, साफ्टवेयर, टेलीकॉम और पेट्रोलियम इंडस्ट्री में अनेक अवसर उपलब्ध हैं। भारत में विप्रो, आईबीएम, इंफोसिस, डेल, रिलायंस, गूगल, एक्सिस बैंक, भारती एयरटेल, बीपीसीएल, टाटा एआईजी और स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसी कम्पनियां एथिकल हैकर्स को नियुक्त कर रही हैं।
वेतन : फ्रेशर यहां 2.5 से 4 लाख रुपये सालाना कमा सकते  हैं। एक साल बाद वे करीबन 5 से 6 लाख रुपये वेतन के रूप में कमा सकते हैं। पांच साल के अनुभव के बाद आप 10 से 12 लाख रुपये सालाना कमा  सकते हैं।  उच्च अकादमिक योग्यताओं वाले उम्मीदवार अपने पद के अनुसार 30 लाख रुपये तक वेतन प्राप्त कर सकते हैं।
संस्थान : निम्नलिखित संस्थानों से एथिकल हैकर्स के लिए कोर्सेज  किए जा सकते हैं :-
(1) इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय
(2) गुजरात फोरेंसिक सांइसेज यूनिवर्सिटी
(3)आईआईआईटी इलाहाबाद
(4) अमृता विश्वविद्यापीठम यूनिवर्सिटी, अमृता स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग
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एथिकल हैकिंग में करिअर

प्रोफेशनल एथिकल हैकर्स अपनी जानकारी, ज्ञान और समझ के आधार पर न सिर्फ कंपनी की कॉन्फिडें शल डिटेल्स को सुरक्षित रखते हैं बल्कि हैकिंग किस लोकेशन से हुई है, उसे भी ट्रेस करने में सक्षम होते हैं

भारत में ऑफलाइन और ऑनलाइन एथिकल हैकिंग कोर्सेज की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। आज लगभग सभी पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर कंपनियां इनफॉम्रेशन टेक्नोलॉजी की फील्ड में अपने वेब प्रॉपर्टीज को क्रिमिनल हैकिंग से सुरक्षित रखने की तीव्र जरूरत महसूस करते हैं। इसके लिए उन्हें प्रोफेशनल एथिकल हैकर्स पर निर्भर रहना पड़ता है। ये प्रोफेशनल एथिकल हैकर्स अपनी जानकारी, ज्ञान और समझ के आधार पर न सिर्फ कंपनी की कॉन्फिडेंशल डिटेल्स को सुरक्षित रखते हैं बल्कि हैकिंग किस लोकेशन से हुई है उसे भी ट्रेस करने में सक्षम होते हैं। यह काफी जिम्मेदारियों भरा और फायदेमंद कार्य है। यदि आप आईटी क्षेत्र में एक्साइटिंग करियर बनाना चाह रहे हैं तो एथिकल हैकिंग में ट्रेनिंग प्रोग्राम काफी मददगार साबित हो सकती है।


एथिकल हैकिंग कोर्सेज- भारत में कई प्रकार के एथिकल हैकिंग ट्रेनिंग कोर्सेज ऑफर कराए जाते हैं, जिसमें शामिल है प्रैक्टिकल सेक्योरिटी ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन ट्रेनिंग, कम्प्लाइयंस ट्रेनिंग, ऑनलाइन प्रोफेशनल डेवलपमेंट ट्रेनिंग, आईटी ऑडिट और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ट्रेनिंग आदि। इसके अलावा कुछ पॉपुलर ट्रेनिंग प्रोग्राम्स जैसे वेब डिफेंसेज, लाइसेंस्ड पेनेट्रेशन टेस्टर, साइबर फॉरेंसिक और सर्टिफाइड एथिकल हैकर आदि भी इस फील्ड में उचित जानकारी के लिए आवश्यक व महत्वपूर्ण कोर्सेज हैं। साथ ही एथिकल हैकिंग से संबंधित अन्य कोर्सेज इस प्रकार हैं- इन्ट्रूजन प्रिवेंशन, एडवांस्ड कंप्यूटर फॉरेंसिक्स, रिवर्स इंजीनियरिंग ट्रेनिंग, डाटा रिकवरी ट्रेनिंग, जावा और जेईई के लिए सिक्योर कोडिंग, डाटाबेस सिक्योरिटी- एमएस, एसक्यूएल सर्वर और ओरैकल सर्वर, सर्टिफाइड इंफॉम्रेशन सिक्योरिटी कंसल्टेंट (सीआईएससी), हैकर ट्रेनिंग ऑनलाइन, एक्सपर्ट पेनेट्रेशन टेस्टिंग, ऑपरेटिंग सिस्टम सिक्योरिटी-विंडो और यूनिक्स, सर्टिफाइड सिक्योर नेट डेवलपर(सीएसडीडी), वायरलेस सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के लिए सिक्योरिटी अवेयरनेस आदि।

योग्यता- एथिकल हैकिंग में, जो कैंडिडेट सर्टिफाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स करना चाहते हैं उन्हें ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे विंडो 2000 और लिनक्स की जानकारी के साथ अनुभव भी जरूरी है।टीसीपी/आईपी में भी विशेषज्ञता दूसरी जरूरत है।

जॉब प्रॉस्पेक्टस- साइबरस्पेस में आपराधिक हैकिंग को रोकने और उसकी गोपनीयता और सुरक्षा के प्रति बढ़ती चिंता भारत में नैतिक हैकर्स(एथिकल हैकर्स) के करियर को काफी बढ़ावा दिया है। आज लगभग सभी छोटे से बड़े पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर कंपनियों के पास एथिकल हैकिंग सेल या इस तरह की सर्विसेज उपलब्ध हैं ताकि क्लाइंट, कस्टमर, क्रेडिट कार्ड से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके। ऐसे में इस क्षेत्र में विशेषता हासिल छात्रों की मांग हमेशा रहती है। अनुभवी व्यक्तियों के लिए इस कार्यक्षेत्र में वेतन सालाना रूप से लाखों में होती है।

संस्थान- इंटरनेट सुरक्षा और वेब विकास व्यापार(वेब डेवलपमेंट बिजनेस) के लिए लगातार बढ़ती मांग के कारण ही भारत में भी नैतिक पाठय़क्रमों के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। आज भारी संख्या में कई संस्थान सर्टिफिकेट प्रोग्राम्स ऑफर करने लगे हैं ताकि इस कार्यक्षेत्र में विशेषज्ञ प्रोफेशनल को सूझ-बूझ के साथ कार्य करने के समर्थ बनाया जा सके। कुछ संस्थान इस प्रकार हैं- जोडो इंस्टीटय़ूट, नोएडा एप्पिन नॉलेज सॉल्यूशन, बैंगलुरू साईकॉप्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद फ्यूचरप्वाइंट टेक्नोलॉजी, हैदराबाद लाइफ ए5 एकेडमी, आगरा टेकडिफेंस प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद एडेप्ट टेक्नोलॉजी, चेन्नई एसआईएस ट्रेनिंग सेल, नोएडा नेटवर्क इंटेलिजेंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई इनोबज नॉलेज सॉल्यूशन्स, दिल्ली
(अंशुमाला,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,9.8.11)
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हैकिंग का बढ़ता खतरा

आज पूरी दुनिया आपस में इंटरनेट के जरिये जुड़ी हुई हैं. दुनिया के सारे काम कंप्यूटर और इंटरनेट पर किये जा रहे हैं. प्रशासनिकव्यवसायिक,बैकिंग संबंधी सभी काम इंटरनेट के सहारे ही अंजाम दिये जा रहे है . यानी इंटरनेट एक विश्‍वव्यापी प्लेटफार्म है. पिछले 20 वर्षों के लोगों की एक नई नस्ल विकसित हो गया है। वे अपनी संस्कृतिअपनी प्रौद्योगिकी और अपनी भाषा है। उनमें समुद्री डाकू और चोरमशहूर हस्तियों और दार्शनिकोंडींग हांकते और पुलिसनायक और खलनायक हैं। वे पूरी दुनिया में संचालित है  लेकिन साइबरस्पेस उनके असली घर है। और अब वहाँ एक संघर्ष है अपनी डाकू और इसकी स्वर्गदूतों के बीच साइबरस्पेस में है। यह अंदर है बहुत अलग मिशन जो अब लोगों को जाना जाता है की एक विविध नस्ल हैकर के रूप में दुनिया के लिए ड्राइव की कहानी है। 24 घंटे एक दिनसात दिनों में एक हफ्तेएक युद्ध वेब पर लड़ा जा रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर यदि पूरी दुनिया एक साथ चहलकदमी कर रही हैतो पूरी दुनिया पर एक साथ ही हैकिंग का खतरा भी मंडरा रहा है. इस खतरे से कोई भी बचा हुआ नहीं है. आज किसी देश पर प्रत्यक्ष आक्रमण की जगहसाइबर हमले को आसान माना जा रहा है. हैकिंग के खतरे पर विशेष प्रस्तुति

दुनिया में जिस तरह से बदलाव हुए हैंउसने नयी तरह की चुनौतियों और खतरों को भी जन्म दिया है. इन चुनौतियों में सबसे प्रमुख है हैकिंग का खतरा. आज दुनिया आपस में इंटरनेट के जरिये जुड़ी हुई हैं. आज दुनिया के सारे काम कंप्यूटर और इंटरनेट पर किये जा रहे हैं. प्रशासनिक कामकाज से लेकर बैंकिंग कारोबार तक सारे काम इंटरनेट के सहारे किये जा रहे हैं. इंटरनेट एक विश्‍वव्यापी प्लेटफार्म है. इस प्लेटफॉर्म पर अगर पूरी दुनिया एक साथ चहलकदमी कर रही हैतो पूरी दुनिया पर एक साथ हैकिंग का खतरा भी मंडरा रहा है. इस खतरे से कोई भी बचा नहीं हुआ है. 
आज किसी देश पर प्रत्यक्ष आक्रमण की जगह उस पर साइबर हमले को आसान माना जा रहा है. अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआइ ने साफ तौर पर कहा है कि आने वाले समय में सबसे बड़ा युद्ध साइबर दुनिया में लड़ा जायेगा. 2012 में दुनिया के सामने जिन चुनौतियों का जिक्र किया गयाउनमें साइबर हमला सबसे प्रमुख है. इसे आम बोलचाल की भाषा में इंटरनेट हैकिंग’ के नाम से जाना जाता है. 
हैकिंग समूह की  धमकी 

पिछले दिनों हैकिंग समूह-एनॉनिमस ने धमकी दी है कि वह  दुनिया भर में इंटरनेट से जुड़ी गतिविधियों को बंद कर देगा। इस समूह की धमकी सच हुई तो इंटरनेट से होने वाले काम शनिवार को नहीं हो सकेंगे। 
अंतर्राष्ट्रीय पुलिस (इंटरपोल) के महासचिव रोनाल्ड के. नोबल ने कहाऑपरेशन ग्लोबल ब्लैकआउट 2012 दुनिया भर में शनिवार को इंटरनेट को पूरे दिन के लिए बंद कर सकता है। इसके अंतर्गत इंटरनेट के लिए जरूरी डोमेन नेम सर्विसेज (डीएनएस) सर्वरों को बेकार कर दिया जाएगाजिसके कारण वेबसाइटें काम नहीं करेंगी।  नोबल ने यह जानकारी 13वें डीपी कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान दी। नोबल के मुताबिक एनॉनिमस वॉल स्ट्रीट धड़ाम से गिरने और गैरजिम्मेदाराना नेतृत्व के अलावा कई अन्य कारणों से इंटरनेट बंद करने की धमकी दी है। वह इन सब गतिविधियों का विरोध कर रहा है। नोबल ने कहा, 'एनॉनिमस कोलम्बियाचिली और स्पेन के कई निजी और सरकारी वेबसाइटों को अपना निशाना बना चुका है। इस सम्बंध में जांच जारी है।'' 
इस बीचइंटरपोल ने इस समूह की धमकी को बेकार करने के लिए व्यापक अभियान चलाकर समूह के 31 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां फरवरी और मार्च महीने में हुई हैं।

चीन से साइबर हमला 

जानकारों की मानें तो चीन ने भारत के खिलाफ हैकिंग के सहारे एक साइबर जंग शुरू कर दी है. चीन में स्थित समूह भारतीय वेबसाइटों को निशाना बना रहे हैं. इनके द्वारा भारत के आधिकारिक वेबसाइट्स से संवेदनशील जानकारियां चुरायी जा रही हैं. इस तरह चीन भारत के नेशनल इंफॉरमेटिक्स सेंटर और विदेश मंत्रालय को भी निशाना बना चुका है. 
भारतीय नेटवर्क के खिलाफ तीन प्रकार के हथियार इस्तेमाल किये जा रहे हैं- बीओटीएस(बॉट्स)की लॉगर्स और मैपिंग ऑफ नेटवर्क. चीनी एक्सपर्ट बॉट्स बनाने में माहिर माने जाते हैं. बॉट्स एक परजीवी प्रोग्राम हैजो नेटवर्क को हैक करता है. अनुमान के मुताबिक भारत में 50000 से ज्यादा बॉट्स हैं.
चीन है हैकिंग का प्रमुख स्रोत 

अमेरिका ने चीन पर हैकरों को पनाह देने और उनकी मदद करने का आरोप लगाया है. एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक चीन और रूस उसके खिलाफ हैकरों की मदद से एक तरह का साइबर युद्ध चला रहे हैं. गौरतलब है कि दुनिया में हैकिंग का सबसे बड़ा अड्डा ब्राजील को माना जाता है. हालांकिचीन ने पिछले साल हैकिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाये थेलेकिन फिर भी चीन हैकिंग का मुख्य केंद्र बना हुआ है. 
चीन में हैकिंग से आंदोलन! 

ऐसा माना जा रहा है कि पिछले हफ्ते चीन में जो 500 से ज्यादा सरकारी और गैरसरकारी वेबसाइटों की हैकिंग की गयीउसमें चीनी आंदोलनकर्ताओं का हाथ है. दरअसल हैकिंग को सिर्फ व्यक्तिगत लक्ष्यों से ऊपर उठकर अब एक ब.डे हथियार के तौर पर भी इस्तेमाल में लाया जा रहा है और इसका प्रयोग उन देशों और सरकारों के खिलाफ किया जा रहा हैजिनके खिलाफ प्रत्यक्ष कार्रवाई का फिलहाल कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है. इन मामलों में कई बार हैकिंग आंदोलन के अस्त्र के रूप में भी सामने आया है. हैकरों ने घोषणा की है कि वे चीन में इंटरनेट की सेंसरशिप के खिलाफ आगे भी हैकिंग को अंजाम देते रहेंगे. 
गौरतलब है कि अज्ञात हैकरों ने चीनी साइटों को हैक करके उस पर अपना संदेश डाला था- चीन की जनता के लिए : आपकी सरकार आपके देश में इंटरनेट को अपने शिकंजे में रखे हुए है. वह हर ऐसी चीज का सेंसरशिप करना चाहती हैजो उसे उसके हित के लिए खतरनाक नजर आता है. 
यहां यह जानना अहम है कि चीन में वास्तव में इंटरनेट पर तरह-तरह की पाबंदियां हैं और इन पाबंदियों के खिलाफ ही करीब दो साल पहले सर्च इंजन गूगल ने चीन में अपना कारोबार बंद कर दिया था. इसके लिए चीन में एक ग्रेट फायरवॉल का इस्तेमाल किया जाता हैजो इंटरनेट की हर गतिविधि की जानकारी रखता है और किसी आपत्तिजनक सामग्री को प्रकाशित नहीं होने देता.
क्या है हैकिंग 

कंप्यूटर पर वायरस के हमले के बारे में तो हम सब सुनते हैंलेकिन कंप्यूटर हैक होने का खतरा आज वायरस से भी ज्यादा गंभीर रूप ले चुका है. हैकिंग के जरिये कोई हैकर किसी नेटवर्क के कंप्यूटर पर पूरी तरह कब्जा जमा लेता है. वह सिर्फ आपकी सूचनाओं को ही नष्ट नहीं करताबल्कि उसका अपने हिसाब से इस्तेमाल कर सकता है. जाहिर हैकिसी की गोपनीय जानकारी चुराकर उसे नुकसान पहुंचाना काफी आसान है. वास्तव में हैकिंग एक हुनर हैजिसमें कंप्यूटर प्रोग्रामों के जरिये किसी नेटवर्क के कंप्यूटरों को अपने वश में किया जाता है. जब कोईदेश किसी अन्य देश के खिलाफ इस तरह से इंटरनेट हैकिंग को प्रोत्साहित करता हैतो इसे साइबर युद्ध’ कहा जाता है. आज की तारीख में जब सूचनाएं ही ताकत हैंएक देश दूसरे देश की सूचना पर कब्जा जमा कर या उसे हैकिंग के जरिये चुराकर उसे आसानी से नुकसान पहुंचा सकता है. हालांकिआज की तारीख में एक दूसरे पर हैकिंग का आरोप लगाना आम बात हैलेकिन हकीकत है कि कुछ देश हैकिंग को ज्यादा बढ.ावा दे रहे हैं. 

सिर्फ नकारात्मक नहीं है हैकिंग

हैकिंग से सिर्फ नकारात्मक अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए. दरअसल आज की तारीख में हैकर सरकार और एजेंसियों को मदद पहुंचाते हैं. हैकिंग की मदद से सरकार या खुफिया एजेंसी किसी एकाउंट को हैक करके वहां से सूचनाएं और सबूत जुटाती हैं. यही कारण है कि कई संस्थान एथिकल हैकिंग’ का कोर्स भी कराते हैं. 
आंदोलनकर्ताओं का अस्त्र हैकिंग

समाचार एजेंसी रायटर की एक खबर के मुताबिक वर्ष 2011 में हैकिंग के ज्यादातर मामले उन आंदोलनकर्ताओं ने अंजाम दियेजो सरकार और कॉरपोरेट नेटवर्क के सिस्टम को हैक करके ऐसी जानकारी निकालकर उनकी साई दुनिया के सामने लाना चाहते थे. वेरीजॉन कम्युनिकेशन इंक के मुताबिक यह हैकिंग की दुनिया में ब.डे बदलाव का लक्षण माना जा सकता हैक्योंकि इससे पहले हैकिंग का काम मुख्यत: पैसे संबंधी जालसाजी और अपराध को अंजाम देने के लिए किया जाता था. इस टेलीकम्युनिकेशन कंपनी ने पांच देशों की लॉ इंफोर्समेंट एजेंसीज के साथ हैकिंग के855 मामलों में 17.4 करोड़ रिकॉर्डस की जांच करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला. उनके मुताबिक यह एक नया किस्म का एक्टिविज्म हैजिसे हैक्टिविज्म’ कहा जा सकता है.
हैक किये गये आंकड़ों में 58 फीसदी आंक.डे इस हैक्टिविज्म से संबंधित थे. इस हैकिंग ग्रुप ने अपना नाम एनॉनिमस यानी अज्ञात ग्रुप रखा है. चीन में भी इस ग्रुप ने ही हैकिंग की जिम्मेदारी ली है. 
वर्ष 2011 में भी इस ग्रुप ने एक के बाद एक हैकिंग की घटनाओं की जिम्मेदारी ली थी. इसने पिछले साल ट्यूनीशियाअल्जीरियाजिम्बाब्वे और दूसरे देशों की वेबसाइटों को निशाना बनाया था. इसके अलावा सेना के ठेकेदारोंकानून इंफोर्समेंट एजेंसियों और सोनी कॉर्पन्यूज कॉर्प और एप्पल इंक को भी निशाना बनाया गया. जानकारों का मानना है कि इंटरनेट एक्टिविज्म के इस दौर में हैक्टिविज्म का पूरा जोर रहेगा. हालांकि इसे अंतरालों में अंजाम दिया जायेगा. यानी कभी अति-सक्रियतातो कभी थोड़ी निष्क्रियता. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी की चोरी के लिए सिर्फ चार फीसदी हैकिंग को अंजाम दिया गया. हालांकिइस चोरी से मिलने वाला फायदा जरूर हैक्टिविज्म से होने वाले आर्थिक फायदे से बड़ा रहा होगा. ब.डे संस्थानों में हुई हैकिंग की करीब 40 फीसदी घटना संवेदनशील जानकारियोंकॉपीराइट जानकारियों और ट्रेड सीक्रेट्स से जुड़ी हुई थीं. 
पाक की भारत विरोधी साइबर जंग 

हैकिंग देशों के बीच ब.डे युद्ध के मैदान के तौर पर उभरा है. अब जबकि दो देश प्रत्यक्ष युद्ध नहीं लड़ सकतेवे अपने प्रतिद्वंद्वियों के कंप्यूटर नेटवर्क को हैक करके उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले एक वर्ष में भारत सरकार की 112वेबसाइट पाकिस्तान आधारित एच4टीआर सीके नाम के समूह द्वारा हैक की गयी. भारतीय अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि हैकिंग देश के लिए बड़ा खतरा बन चुका है. 2011 में बीएसएनएलसीबीआइ जैसे कई अहम संगठनों को निशाना बनाया गया. 
गौरतलब है कि बीएसएनएल की फोन डायरेक्ट्री में लाखों लोगों की पहचानपता और उनका फोन नंबर है. इन नंबरों में सेंध लगाकर कोई बड़ी आसानी से भारत-विरोधी गतिविधि को अंजाम दे सकता है. जानकारों का कहना है कि भारत में ऑनलाइन सुरक्षा की तैयारी काफी कमजोर है. 
भारत सरकार के ज्यादातर संगठनों की वेबसाइट सिंगल सर्वर पर चलायी जाती हैंऐसे में यह आसानी से हैकरों के निशाने पर आ जाती हैं. पाकिस्तान भारत के खिलाफ1998 से साइबर युद्ध’ चला रहा है. लेकिन अभी तक इसने इतना गंभीर रूप अख्तियार नहीं किया था. 
पाकिस्तानी समूह मिलवर्म ने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर की वेबसाइट पर हमला कियाथालेकिन उस समय डेटा की किसी किस्म की चोरी नहीं की गयी थीबल्कि वहां कुछ भारत विरोधी नारे लगा दिये गये थे. सीबाआइ भी पाकिस्तानी हैकिंग का शिकार हो चुकी है और एक बार तो इसे हैकिंग के कारण अपनी वेबसाइट 15 दिनों के लिए बंद करनी पड़ी थी. हैकरों ने ओएनजीसीइंस्टीट्यूट आफ रिमोट सेंसिंग आदि संगठनों को भी अपने निशाने पर लिया है. साइबर हमलों के बारे में बार-बार आगाह किये जाने पर भी भारत इससे लड़ने के लिए पुख्ता तैयारी करता नजर नहीं आता. पाकिस्तान ने भारत की वेबसाइटों पर हमला करने के लिए हैकरों के कई समूह तैयार किये हैं. इनमें पाकिस्तान जी फोर्स और पाकिस्तान साइबर आर्मी प्रमुख है. आइएसआइ ने पाकिस्तान हैकर क्लब’ नाम से एक अलग दस्ते का निर्माण ही किया था. इन समूहों ने कम-से-कम 500 भारतीय वेबसाइटों पर हमला किया है. 
भारत के जानकार इस चुनौती से निपटने के लिए क.डे उपायों की वकालत करते रहे हैं. जिसमें सिंगल सर्वर की जगह मल्टी सर्वर का इस्तेमाल और विशेष दस्ते का निर्माण शामिल है. उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2011 में 14000 से ज्यादा सरकारी तथा कॉरपोरेट वेबसाइट को हैकरों ने नुकसान पहुंचाया. 
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इंटरनेट की उपयोगिता को लगा हैकिंग का ग्रहण

इन्टरनेट की लोकप्रियता और आवश्यकता निरन्तर बढ़ रही है। इस आधुनिक और त्वरित गति तकनीक के साथ.साथ कुछ खतरे तथा परेशानियां भी बढ़ गयीं हैं। सूचना, ज्ञान और जानकारी के अथाह भंडार को हम अलादीन के चिराग की उपमा सहज ही दे सकते हैं। कुछ बटन दबाते ही मनचाहा विवरण हमारे सामने होता है जिसे हम सहेज कर रख सकते हैं या उसका प्रिन्ट ले सकते हैं और जिसका आवश्यकतानुसार उपयोग कर सकते हैं। अनगिनत युवा नेट सर्फिंग और चैटिंग करते हैं। इस आधुनिक तकनीक ने मनोरंजन, गपशप और देश.विदेश में दोस्त बनाना भी बेहद आसान बना दिया है। अधिकांश किशोर और युवा विपरीत लिंगी से (भले ही वे एक दूसरे से झूठ बोल रहे हों) मैत्री कर जमकर चैटिंग का आनन्द लेते हैं। इस नयी पीढ़ी के तमाम लोगों के लिए चैटिंग दिनचयर का ही अंग बन गयी है। 

सर्फिंग और चैटिंग हैकिंग के चलते कभी भी परेशानी का कारण बन सकते हैं। आजकल हैकिंग का जोर काफी बढ़ रहा है। नयी तकनीक की जानकारी रखने वाले किसी भी शरारती या शातिर दिमाग वाले व्यक्ति के लिए हैकिंग बहुत आसान कार्य है। हैकिंग के लिए किसी विशेष योग्यता या क्षमता की आवश्यकता नहीं होती। हैकिंग करने वाले को हैकर कहा जाता है। हैकर की पहुंच दूसरों के निजी ई.मेल और फाइलों तक सहज ही हो जाती है। सर्फिंग के दौरान हाऊ टू डू गाइड्स, ऑटोमेटेड टूल्स आदि के कारण यह कार्य मुश्किल नहीं रह जाता। भले ही ज्यादातर किशोर और युवा मजे के लिए ही हैकिंग कर हैकर बनते हैं। पर हैकिंग का कार्य एक साइबर अपराध है। 

आईटी एक्ट के अनुसार, किसी के निजी ई.मेल पढ़ना एक अपराध है। हालांकि व्यावसायिक प्रतिस्पद्धर के चलते हैकिंग कापोर्रेट जगत में एक व्यवस्थित अपराध बन गयी है। हैकरों को 2 नामों से जाना जाता है. व्हाइट हैट और ब्लैक हैट हैकर। बड़ी.बड़ी कम्पनियां अपने सुरक्षा तन्त्र को मजबूत बनाए रखने के लिए एथिकल एक्सपर्ट व्हाइट हैट हैकर नियुक्त करती हैं। ये किसी साइबर अपराध में शामिल नहीं होते अपितु साइबर अपराधों का पता लगाने और उनकी रोकथाम में मदद करते हैं। ज्यादातर मामलों में उत्सुकता और कुछ करके देखने के मजे लेने की इच्छा के कारण किशोर और युवा जाने.अनजाने इस अपराध कर्म के सहयोगी बन जाते हैं। 

किशोर और युवा वर्ग हैकिंग का स्वयं आसानी से शिकार बन जाता है। हैकिंग के क्षेत्र के उस्ताद तरह.तरह के प्रलोभन से किशोर और युवा वर्ग को अपने जाल में फंसाते हैं। गेमिंग और चैटिंग आज के बहुत आकर्षक क्षेत्र हैं। एक अन्य आकर्षण है पोर्न साइट्स। इन साइट्स के होम पेज व कुछ अन्य हिस्सों में दी गयी सामग्री, चित्रों या वीडियो क्लिपिंग को देखकर किशोर और युवा ही नहीं बड़े भी कुछ और देखने के लिए इनके आकर्षण में फंस जाते हैं। इन साइट्स की सदस्यता के बहाने लोगों से अन्य विवरण के साथ.साथ क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते आदि के बारे में आवश्यक जानकारी भी प्राप्त कर ली जाती है। चैटिंग के जरिए भी हैकर चैट रूम में प्रवेश कर उपयोक्ता को धीरे.धीरे विश्वास में लेकर अपने काम की जानकारी ले लेते हैं। इस जानकारी का उपयोग हैकर अपने हित में और उपयोक्ता को नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैंं।

हैकिंग से बचने के लिए उपयोक्ता को स्वयं ही सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही इसके लिए हर स्तर पर सावधानी बरतना आवश्यक है। स्कूल.कॉलेजों में सिक्योरिटी नार्म्सको अपनाया जा रहा है। शिक्षा संस्थानों के अलावा सरकार द्वारा अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठाया जाना भी जरूरी है। उपयोक्ता और अभिभावकों को भी सावधान रहने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के द्वारा की गयी नेट सर्फिंग पर नजर रखना चाहिए। हालांकि साइबर कैफे आदि के उपयोग को देखते हुए ऐसा कर पाना काफी मुश्किल है। इन्टरनेट के तेजी से होते प्रसार और अच्छी बैंडविड्थ की सुविधा ने नि:संदेह जागरूक अभिभावकों के माथे पर पिंता की एक और लकीर बढ़ा दी है। 

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आज के भागमभाग के समय में अधिकांश सक्षम अभिभावकों के पास बच्चों की आर्थिक जरूरतों की पूर्ति के अलावा उनके लिए समय ही नहीं है। कम से कम इतना तो किया ही जा सकता है कि इंटरनेट पर महत्वपूर्ण निजी जानकारियां, फोटो आदि, जिनसे कोई आपको आर्थिक हानि पहुंचा सके या ब्लैकमेल कर सके, देने से बचना चाहिए। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की नेट सर्फिंग पर नजर रखें। नियमित रूप से सर्फिंग के दौरान विजिट की गयी साइट्स की जांच करते रहना चाहिए। हैकिंग के बारे में बताते हुए उन्हें सावधान रहने की हिदायत देना भी जरूरी है।

हैकिंग से बचने के लिए बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी प्रशिक्षित किया जाना जरूरी हो गया है। हैकिंग के विरुद्ध आवश्यक कानून बनाने की भी जरूरत है। हैकर की पहचान करना साइबर क्राइम विशेषज्ञों के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है पर इस अपराध के लिए बड़ी सजा का प्रावधान नहीं है। विशेष रूप से अवयस्क हैकिंग अपराधियों को चेतावनी और मामूली सजा दी जाती है।
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एजुकेशन और जॉब्स एक्सपट्र्स के मुताबिक नए सेक्टर्स में आने वाली हैं अब ढेरों जॉब्स, फाइनेंस और एक्चुरियल साइंस है अब युवाओं की पसंद, आईटी इनेबल सर्विसेज हैं थर्ड नंबर पर

जयपुर। रिसेशन के बाद एंप्लॉयमेंट सेक्टर में पिछले दो सालों में अच्छा खासा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां कुछ फील्ड में ही जॉब्स अवेलेबल थीं। वहीं अब कई नई स्ट्रीम्स और सेक्टर्स डवलप हो चुके हैं, जिनमें आने वाले समय में जॉब्स की अपॉच्र्युनिटीज खूब होंगी। हाल ही हुई नासकॉम की स्टडी के मुताबिक 2012 तक कई नए सेक्टर्स ऎसे होंगे, जिनमें मैनपॉवर के मुकाबले काफी जॉब्स होंगी। हालांकि शहर का सिनारियो कुछ इस तरह का है कि यंगस्टर्स इन सेक्टर्स पर ध्यान देने की बजाय पुराने सेक्टर्स की ओर ही फोकस्ड हैं। नासकॉम की इस स्टडी में प्रोफेशनल एथिकल हैकिंग को बहुत तेजी से बढ़ते हुए ऑप्शन के रूप में बताया गया है। इस सेक्टर में 2012 तक 1,88,000 जॉब्स अवेलेबल होंगी, हालांकि देशभर में 22 हजार के आसपास ही एथिकल हैकर्स उपलब्ध हैं।

यहां जॉब्स अवेलेबिलिटी
शहर के एजुकेशन एक्सपट्र्स के मुताबिक 2012-13 में कई नए सेक्टर्स में जॉब्स होंगी। इनमें फाइनेंस सबसे ऊपर है। अगले दो तीन सालों में देश में कई मल्टीनेशनल कंपनियां अपनी ब्रांचेज खोलेंगी, जिसमें अच्छी खासी मैनपॉवर की डिमांड होगी। नए सेक्टर्स में जॉब अवेलेबिलिटी में टॉप फाइव में आईटी इनेबल सर्विसेज भी शामिल हैं। एथिकल हैकिंग इसी सेक्टर में आता है। एथिकल हैकिंग एक्सपर्ट महेश मेहरा के अनुसार साइबर क्राइम जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए एथिकल हैकर्स की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 

ये हैं टॉप फाइव जॉब्स सेक्टर्स
फाइनेंस
एक्चुरियल साइंस
आईटी इनेबल सर्विसेज
कम्युनिकेशन
प्रोफेशनल कोर्सेज जैसे ऑश्नोग्राफी, वाइल्ड लाइफ और मरीन साइंस

ये कोर्स डिमांड में
इस समय जिस सेक्टर में सबसे ज्यादा जॉब्स हैं, वे हैं इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर। एक्सपर्ट दीपक सक्सेना के अनुसार, जयपुर में फाइनेंस और इंश्योरेंस सेक्टर में सबसे ज्यादा जॉब्स अवेलेबिलिटी है। जयपुर के बाहर तो इस फील्ड में ऑप्शंस और भी ज्यादा हैं। इसे देखते हुए इसमें कई नए कोर्सेज इंट्रोड्यूज हो रहे हैं, लेकिन स्टूडेंट्स का ध्यान अभी इस ओर नहीं है। जयपुर में आने वाले समय में इन्हीं दोनों सेक्टर्स में जॉब्स अवेलेबिलिटी सबसे ज्यादा होगी।

मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग च्वॉइस
गवर्नमेंट तो बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में खूब जॉब्स निकाल ही रही है, साथ ही कई प्राइवेट कंपनियां भी बिजनेस एक्सपेंशन में इंट्रेस्ट दिखा रही हैं। जॉब्स एक्सपर्ट अलका बत्रा के अनुसार, एक्सिस बैंक ने शहर में 15-20 ब्रांचेज खोली हैं और कोडेक जैसी दूसरी कंपनियां भी शहर में एक्सपेंशन में रूचि ले रही हैं। इंश्योरेंस और फाइनेंस सेक्टर में ही सबसे ज्यादा बूम है। रिसेशन के बाद फाइनेंस, क्रिएटिव राइटिंग और आईटी सेक्टर ही सबसे ज्यादा डवलप हुए हैं। 

शहर में नहीं एथिकल हैकिंग एक्सपर्ट
प्रोफेशनल एथिकल हैकिंग के कोर्सेज अभी तक पुणे और बैंगलुरू जैसे शहरों में भी अवेलेबल हैं। एक्सपर्ट हेमंत बताते हैं, हमने यह कोर्स पुणे से किया है। शहर में इन कोर्सेज के लिए इंस्टीट्यूट्स ही नहीं है। यहां तक कि राजस्थान में साइबर सेल भी अच्छे से डवलप नहीं हो पाई है। यहां कोई प्रॉब्लम होने पर दिल्ली- मुंबई से साइबर एक्सपर्ट बुलाए जाते हैं।
ममता थपलियाल
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साइबर सिक्योरिटी

कंप्यूटर और इंटरनेट पर तेजी से बढ़ती हमारी निर्भरता से वर्चुअल वर्ल्ड से जुड़े अपराधों में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की जरूरत काफी बढ़ गई है।

भले ही इंटरनेट ने हमें तमाम सुविधाएं दी हों, पर इस कारण साइबर क्राइम भी विभिन्न रूपों में हमारे सामने आया है। आजकल अक्सर हमें वेबसाइट हैकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, साइबर बुलिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, पोर्नोग्राफी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी भी अहम चुनौती बनती जा रही है। आतंकवादियों द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू कर देने से साइबर टेररिज्म को भी काफी बढ़ावा मिला है। ऐसे में साइबर क्राइम के विभिन्न रूपों का सामना करने तथा उनको रोकने के लिए जागरूकता भी काफी बढ़ी है और इसी का नतीजा है कि साइबर सिक्योरिटी आज कैरियर के रूप में हमारे सामने मौजूद है।

कार्य का स्वरूप
हैकिंग कंप्यूटर यूजर्स की परेशानी का मुख्य कारण है, जिसके जरिए अपराधी गोपनीय सूचनाओं को हैक कर सकता है, जैसे पासवर्ड, के्रडिट कार्ड नंबर और पिन कोड, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड आदि। हैकिंग से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए एथिकल हैकिंग प्रोग्राम की मदद ली जाती है। किसी साइबर क्राइम के बाद यह पता लगाना कि उससे संबंधित ई-मेल कहां से भेजा गया, किस आईपी एड्रेस का उपयोग किया गया आदि कार्य साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के ही जिम्मे होते हैं। इंटरनेट से संबंधित विभिन्न अपराधों को हैंडल करने के लिए साइबर लॉ का भी इस्तेमाल किया जाता है। साइबर एक्सपर्ट की नजर साइबर क्राइम की चुनौतियों पर भी होती है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

कैसे-कैसे कोर्स
साइबर सिक्योरिटी से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं की ट्रेनिंग देने के लिए कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। ये कोर्स शॉर्ट टर्म और लांग टर्म दोनों तरह के होते हैं। इसके तहत सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा और बैचलर स्तर तक के पाठ्यक्रम हैं। इन पाठ्यक्रमों को आप अपनी सुविधानुसार रेगुलर, डिस्टेंस या ऑनलाइन, किसी भी मोड से चुन सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी से संबंधित पाठ्यक्रमों में साइबर सिक्योरिटी की चुनौतियां, उनसे बचने के उपाय, साइबर क्राइम और जांच की विधि, रोकथाम के उपाय, साइबर लॉ, ऑनलाइन डाटा सिक्योरिटी, ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है।

शैक्षणिक योग्यता
कंप्यूटर और आईटी से संबद्ध होने के बावजूद साइबर सिक्योरिटी से संबंधित पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आपके पास कंप्यूटर/आईटी में उच्च डिग्री हो। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स, किसी भी स्ट्रीम के विद्यार्थी इस क्षेत्र में कैरियर बना सकते हैं, पर इसके लिए कंप्यूटर की बेहतर जानकारी जरूरी है। चूंकि इस कैरियर का मुख्य आधार आईटी है, इसलिए ऐसे कोर्स आईटी प्रोफेशनल्स के कैरियर को एक नई दिशा दे सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी से संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं है, जबकि कुछ कोर्स ग्रेजुएशन के बाद ही किए जा सकते हैं। लॉ, आईटी, पुलिस, सुरक्षा विभाग आदि में कार्यरत व्यक्ति भी इन कोर्सेज के लिए आवेदन कर सकते हैं।

मुख्य संस्थान
साइबर सिक्योरिटी से संबंधित उच्च स्तर के कोर्स फिलहाल गिने-चुने संस्थानों में ही उपलब्ध हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद द्वारा साइबर लॉ ऐंड इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी में मास्टर डिग्री का कोर्स कराया जाता है। इसके लिए बीई/बीटेक जरूरी है। एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर होता है। इसके अतिरिक्त इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, दिल्ली द्वारा भी साइबर लॉ में पीजी डिप्लोमा करवाया जाता है, जिसके लिए योग्यता किसी भी विषय में ग्रेजुएशन है। ई-काउंसिल सर्टिफाइड एथिकल हैकर और स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग, हैदराबाद में भी कई पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। साइबर सिक्योरिटी से संबंधित सेमिनार और वर्कशॉप भी समय-समय पर आयोजित होते रहते हैं। इन वर्कशॉप और सेमिनार की जानकारी आप गूगल सर्च से ले सकते हैं। पर विजिट कर आपको कई वर्कशॉप्स की जानकारी मिल जाएगी।

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा भी साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल तैयार करने के उद्देश्य से साइबर सिक्योरिटी में सर्टिफिकेट कोर्स करवाया जाता है। कोई भी डिग्री या डिप्लोमा धारी इस सर्टिफिकेशन को कर सकता है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन साल में दो बार होता है। विशेष जानकारी के लिए आप पर विजिट कर सकते हैं। इसके बाद आप सी-डैक सर्टिफाइड साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल के रूप में काम कर सकते हैं।

रोजगार की संभावनाएं
आईटी इंडस्ट्री, ई-बिजनेस, ई-टिकटिंग, ई-गवर्नेंस, ई-कॉमर्स आदि से संबंधित जितने भी क्षेत्र हैं, उन सभी जगहों पर इस फील्ड के प्रोफेशनल्स की मांग बनी रहती है। कोर्स के बाद विभिन्न आईटी कंपनियों में रोजगार के मौके मिलते हैं, जहां साइबर एक्सपर्ट एवं कंसल्टेंट के रूप में उन्हें मौका मिलता है। बैंकों में भी नियुक्ति होती है। ई-कॉमर्स तथा फाइनेंशियल संस्थानों में ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने तथा हैंडल करने के लिए इन प्रोफेशनल्स की मांग होती है। साइबर लॉ एवं सिक्योरिटी से संबंधित ट्रेनिंग सेंटरों में ट्रेनर के रूप में भी काम किया जा सकता है। पुलिस विभाग एवं सुरक्षा एजेंसियों में साइबर क्राइम एक्सपर्ट के रूप में जरूरत बनी रहती है। फॉरेंसिक फील्ड में भी साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स की मांग होने लगी है। लॉ फर्म्स में लीगल एक्सपर्ट (साइबर) की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा साइबर लॉ कंसल्टेंसी के रूप में इसमें स्वरोजगार के भी मौके हैं। ई-गवर्नेंस के पूरी तरह अस्तित्व में आने के बाद विभिन्न सरकारी विभागों में ऐसे प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के काफी मौके उपलब्ध होंगे।

साइबर सिक्योरिटी से संबंधित कुछ अन्य संस्थान हैं :
इग्नू, नई दिल्ली
एमिटी लॉ स्कूल, नोएडा
दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली
एशियन स्कूल ऑफ साइबर लॉ, पुणे
इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी, मुंबई
आईएमटी, सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग, गाजियाबाद
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साइबर एर्क्‍सपट्स की बढ़ती मांग

अगर विज्ञान वरदान है तो अभिशाप भी है। एक ओर इंटरनेट ने घर बैठे पूरे विश्व को कम्प्यू टर स्क्रीन पर ला दिया है तो वहीं इंटरनेट से पनपे साइबर क्राइम के विभिन्न रूपों से हमें सामना भी करना पड़ रहा है। आजकल अकसर हमें वेबसाइट हैकिंग, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, साइबर बुलिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, पोर्नोग्राफी जैसी समस्याओं से ही नहीं, साइबर आतंकवाद से भी जूझना पड़ रहा है। ऐसे में, साइबर सिक्योरिटी से जुड़े प्रोफेशनल्स की जरूरत काफी बढ़ गई है
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2011 में जहां साइबर हमलों की संख्या 13,500 के करीब थी, वहीं इस साल सितम्बर तक यह संख्या 20,000 है। माना जा रहा है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए देश को पांच लाख पेशेवर चाहिए। यही कारण है कि साइबर अपराध के प्रति बढ़ती जागरूकता व सजगता के कारण साइबर सिक्योरिटी बेहतर करियर के साथ-साथ देश और समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी देता है। कार्य कंप्यूटर यूजर्स के लिए हैकिंग सबसे बड़ी परेशानी है। इसके जरिए अपराधी गोपनीय सूचनाओं को हैक कर सकता है, जैसे पार्सवड, क्रेडिट कार्ड नंबर और पिन कोड, इंटरनेट बैंकिंग पार्सवड आदि। हैकिंग से संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए एथिकल हैकिंग प्रोग्राम की मदद ली जाती है। किसी साइबर क्राइम के बाद यह पता लगाना कि उससे संबंधित ई-मेल कहां से भेजा गया, किस आईपी एड्रेस का उपयोग किया गया आदि कार्य साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट के ही जिम्मे होता है। इंटरनेट से संबंधित विभिन्न अपराधों को हेंडल करने के लिए साइबर लॉ का भी इस्तेमाल किया जाता है।
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एथिकल हैकर मददगार हाथ
मौजूदा दौर में जहां एक तरफ इंटरनेट का बोलबाला हर तरफ सुनाई दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ नामी-गिरामी वेबसाइट्स को हैक किए जाने की रफ्तार भी कुछ कम नहीं है। ऐसे में कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क मालिकों के अनुरोध पर कानून के दायरे में रह कर कुछ हैकर्स उनके सिस्टम और नेटवर्क का जायजा लेते हैं। आपराधिक हैकर्स को मुहैया संसाधनों और काम करने के तरीकों का इस्तेमाल करते हुए ये नैतिक हैकर्स सिस्टम या नेटवर्क की उन कमजोर कड़ियों को ढ़ूंढ़ने का काम करते हैं। हैकर्स इन कमजोर कड़ियों का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं, इसीलिए प्रोग्रामर्स के लिए मददगार साबित ये नैतिक (एथिकल) हैकर्स उनके साथ मिल कर हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नए-नए प्रोग्राम्स तैयार करने में मदद करते हैं। सूचना की सुरक्षा करने वाला यह उद्योग विश्वभर में 21 प्रतिशत की रफ्तार से विकास कर रहा है।
नैतिक हैकिंग को आक्रमण परीक्षण, अतिक्रमण परीक्षण व समाधान दल के रूप में भी देखा जाता है। एक नैतिक मूल्यों पर हैकिंग करने वाले का काम काफी दिलचस्प भी है। वह इस तरीके से काम करते हैं और प्रोग्राम तैयार कर उसे लागू करने में मदद करते हैं, जिससे नेटवर्क और उसके डेटा की सुरक्षा की जा सके। इनके कार्य को इज्जत की नजर से देखा जाता है, क्योंकि हैकर्स के विपरीत वे कानूनी दायरे में रहते हुए कंपनियों की मदद उनके नेटवर्क व सिस्टम को सुरक्षित करने के लिए करते हैं।
वेतन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कोई भी नया पेशेवर सालाना 2.5 लाख रुपये कमाने से शुरू करते हुए अपने अनुभव से 4.5 लाख रुपये तक कमा सकता है। 5 साल के कार्यानुभव के साथ कोई भी पेशेवर 10 से 12 लाख रुपये सालाना तक कमा सकता है।
योग्यता एवं कौशल
प्राथमिक तौर पर किसी भी पेशेवर हैकर के लिए प्रोग्राम्स को विभिन्न कंप्यूटर लैंग्वेज जैसे कि सी, सी++, पर्ल, पायथन और रूबी आदि में एंकोडिंग करने की क्षमता होनी चाहिए।
एक पेशेवर हैकर होने के लिए जरूरी है कि उनका नजरिया बाकी हैकर्स से कुछ हटकर हो। उन्हें रचनात्मक होते हुए बाकी से अलग समाधान पेश करना होता है
डिसअसेंबल बायनरीज का मूल्यांकन करने वालों के लिए असेंबली लैंग्वेज की समझ होना भी बेहद जरूरी है
विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे माइक्रोसॉफ्ट विंडोज, लाइनक्स के विभिन्न वजर्न्स आदि की समझ भी अनिवार्य है।
नेटवर्क उपकरणों, काउंटिंग स्विचेज, राउटर्स और फायरवॉल्स की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
पेशेवर हैकर को टीसीपी/आईपी प्रोटोकॉल जैसे एसएमटीपी, आईसीएमपी और एचटीटीपी की मूलभूत जानकारी होना जरूरी है।
कैसे पहुंचें
विज्ञान विषयों (भौतिकी, रसायन और गणित) के साथ 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद देश के किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस या कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल करें। स्नातक पाठय़क्रम के दौरान आप एथिकल हैकिंग के सर्टिफिकेट कोर्स में प्रवेश पा सकते हैं। इस कोर्स के माध्यम से आप इस क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं से रू-ब-रू हो सकते हैं। इन दिनों इंजीनियरिंग कॉलेजों में एथिकल हैंकिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी है। अगर आप एक एथिकल हैकर के रूप में करियर बनाने के इच्छुक हैं तो इस तरह की गतिविधियों में अपनी भागीदारी जरूर सुनिश्चित कर लें। साथ ही इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि सूचना प्रौद्योगिकी को लेकर आपकी जानकारी बहुत अच्छी हो, जिसके लिए आपकी दिलचस्पी कंप्यूटर पर काम करने में हो।
संस्थान एवं वेबसाइट्स
आईएसीएम स्मार्टलर्न, दिल्ली
www.iacmindia.com
अपिन सिक्योरिटी ग्रुप
www.appinonline.com
कायरियोन डिजिटल सॉल्यूशंस
http://www.kyrion.in/security/
के-सिक्योर आईटी सिक्योरिटी सर्विसेज
http://www.ksecure.net/ethical-hacking-training.htm
नफा-नुकसान
यह उद्योग काफी तेजी के साथ बढ़ रहा है और इसमें संभावित पेशेवरों के लिए सुनहरा भविष्य भी देखा जा 
सकता है।
नए पेशेवर यहां अच्छी नौकरी आसानी से पा सकते हैं।
आपको कई नामी-गिरामी कंपनियों व लोगों के साथ काम करने का मौका मिल सकता है।
सूचना सुरक्षा उद्योग बहुत तेजी से बदल रहा है, इसलिए जरूरी है कि आप भी यहां के चलन के साथ खुद को बदलते रहें।
इस काम में अच्छा पैसा मिलता है।
कुछ कंप्यूटर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स, जैसे माकर्स जे रैनम एथिकल हैकर जैसे शब्द पर सहमत नहीं हैं, क्योंकि इससे नकारात्मकता का बोध होता है। हो सकता है कि कुछ लोग इस शब्द या इस पद के चलते खुद को इस पेशे से जोड़ने में असहज भी महसूस करें।
दिनचर्या इस प्रकार के एक नैतिक हैकर की आम दिनचर्या कुछ इस प्रकार होती है :
सुबह 9 बजे: दफ्तर पहुंचना
सुबह 10 बजे: एक ऐसी वेबसाइट पर काम शुरू करना, जिसे हाल ही में हैक किया गया हो
दोपहर 2 बजे: दोपहर का भोजन
दोपहर 3 बजे: प्रोग्रामर से संपर्क करना और आगामी हैकिंग के हमलों के लिए नए प्रोग्राम तैयार करना
शाम 5:30 बजे: काम खत्म कर घर की ओर निकला
शाम 7 बजे: विभिन्न नेटवर्क्स की कार्यप्रणालियों व उनमें कमियों का अध्ययन करना और उन्हें सुरक्षित बनाने के करागर उपाय तलाशना।
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Tuesday, 13 August 2013

एथिकल हैकिंग


मैं एक प्रोफेशनल हैकर बनना चाहता हूं। मैंने कॉमर्स से ग्रेजुएशन की है। मैं सिक्योरिटी और एथिकल हैकिंग से जुड़े कुछ कोर्स करना चाहता हूं। मुझे संबंधित करियर संभावनाओं के बारे में भी बताएं।

मोहम्मद अदनान खान

साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की पूरे संसार में काफी मांग है। आज सभी संस्थान, जिनमें बैंक, होटल्स, एयरलाइंस, टेलिकॉम कंपनियां, आईटी कंपनियां, आउट सोर्सिंग यूनिट्स, सरकारी एजेंसियां आदि शामिल हैं, को साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की जरूरत होती है।
एथिकल हैकर के पास प्रोग्रामिंग और नेटवर्किंग स्किल्स के साथ विभिन्न ऑपरेटिंग सिस्टम्स की भी अच्छी जानकारी होनी चाहिए। कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर्स की भी उम्दा जानकारी जरूरी है। एथिकल हैकर बनने के लिए जो बेसिक जरूरत है, वह है सर्टिफाइड एथिकल हैकिंग ट्रेनिंग या साइबर सिक्योरिटी कोड।
देश में इससे संबंधित कुछ ही कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें ज्यादा प्रॉडक्ट ओरिएंटेड  कोर्स हैं या जो स्पेशलाइज्ड कोर्स हैं, वे विदेशी संस्थाओं से टाईअप के रूप में हैं। सर्टिफाइड इंफॉर्मेशन सिस्टम सिक्योरिटी प्रोविजन (सीआईएसएसपी) सर्टिफिकेशन जाना-माना कोर्स है।
एनआईआईटी भी इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी सिस्टम्स में कोर्स ऑफर करता है। इनके अलावा विभिन्न कंपनियां जैसे सिस्को, ग्लोबल ई-सिक्योर, एपिन ऑनलाइन स्पेशलाइज्ड कोर्स कराती हैं। इनमें से किसी भी कोर्स का चयन कर आप इस क्षेत्र मे अपना करियर बना सकते हैं।
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बनें एथिकल हैकर

कई बार आपके पास फर्जी ईमेल आते होंगे, आपका ईमेल अकाउंट कभी हैक भी हुआ होगा, या आपने अपने किसी दोस्त से सुना होगा कि उसका अकाउंट किसी ने हैक कर लिया है और उससे ठगी वाले कुछ मेल भेजे जा रहे हैं। हैकिंग का यह रूप पेशेवर नहीं है, लेकिन इसका एक रूप ऐसा भी है जिसकी मदद से सरकार या खुफिया एजेंसियां किसी एकाउंट को हैक कर वहां से गोपनीय जानकारी इकट्ठा करती हैं। इससे उन्हें अपनी जांच को आगे बढ़ाने या सबूत जुटाने में मदद मिलती है। इसे देखते हुए एथिकल हैंकिंग जैसा कोर्स करियर के लिहाज से काफी अहम है।
साइबर स्पेस में हैकिंग एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर आम तौर पर लोग सहम जाते हैं। वास्तव में हैकिंग भी वायरस की तरह कंप्यूटर की एक बड़ी समस्या है। हैकिंग के द्वारा हैकर आपके कंप्यूटर या आपके संबंधित अकाउंट पर हैकर पूरी तरह से हावी हो जाता है। इसके बाद उसे आपके डेटा को चुराने या खत्म करने की आजादी मिल जाती है। वाई-फाई इंटरनेट कनेक्शन से चलने वाले सिस्टम को हैक करना ज्यादा आसान होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर में घुसपैठ की बढ़ती समस्या से ही निपटने के लिए एथिकल हैकर्स का नया कोर्स करियर के लिए विकल्प के तौर पर एक बेहतरीन मौका बनकर सामने आया है।

बढ़ती डिमांड

यह कोर्स नया है, इसके बारे में लोगों की जानकारी भी कम है। इस वजह से यह क्षेत्र काफी एक्साइटिंग है। इसके विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है। जैसे-जैसे लोगों की निर्भरता इंटरनेट पर बढ़ती जा रही है, नेटवर्क सिक्युरिटी एक चुनौती बनती जा रही है। इस लिहाज से आने वाले दिनों में एथिकल हैंकर्स की डिमांड उम्मीद से कहीं ज्यादा होगी। हरेक कंपनी अपने आंकड़ों को सुरक्षित रखने या प्रतिद्वंद्वी कंपनी की रणनीति को समझने के लिए एथिकल हैकर्स रखने लगी हैं।

एथिकल हैकर के गुण

एथिकल हैकर एक ऐसा व्यक्ति है जो कानूनी तौर पर हैकिंग से बचने के लिए अपने सिस्टम को चुस्त बनाता है। ऐसे लोगों को क्रिमिनल की तरह सोचने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि अपराधियों के दिमाग को समझा जा सके और किसी संभावित अटैक से सिस्टम को बचाया जा सके। उसे कंप्यूटर के टूल्स और तकनीक का गहन ज्ञान होना चाहिए। इस क्षेत्र में कामयाबी के लिए हैकर को कंप्यूटर की गहरी जानकारी के अलावा इंटरनेट की बारीकियों से भी अवगत होना जरूरी है। साइबर क्राइम और एथिकल हैकिंग के बारे में अपडेट रहने से भी हैकर को काफी मदद मिलती है। ईमेल ट्रेस करना, नेटवर्क हैक करना, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की छानबीन और फायरवॉल को उड़ाने का बेसिक ज्ञान हैकर्स के लिए जरुरी है।

कोर्स में क्या

एथिकल हैकिंग कोर्स में इंटरनेट से संबंधित तमाम बारीक चीजों के बारे में सिखाया जाता है। इससे संबंधित कोर्स में सिक्यgरिटी टेस्टिंग की कार्य प्रणाली, ऑफेसिंग स्निफिंग, प्रीविलेज एस्कलेटिंग, हैकिंग, अटैकिंग नेटवर्क वर्क सिस्टम, हैकिंग वेब ऐप्लिकेशन, क्रॉस साइट स्क्रिप्टिंग, ब्रेकिंग आईपी, डिफेसमिंव टेकनीक, सिस्टम हैकिंग पासवर्ड क्रैकिंग, पैनेट्रेशन टेस्टिंग हैकिंग वेबसर्विस वायरस ऐंड वर्म आदि से संबंधित जानकारी दी जाती है।

योग्यता

भारत में कम संस्थान इस कोर्स को कराते हैं। ज्यादातर संस्थानों से एथिकल हैकिंग में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया जा सकता है। इसके लिए ग्रेजुएट होना जरूरी है। वर्तमान में कंप्यूटर के एक्सपर्ट ही ऐसे कोर्स कर रहे हैं जिसके कारण एथिकल हैकर्स की काफी कमी है। सरकारी खुफिया विभाग या अन्य विभाग के लोग भी इस कोर्स को कर रहे हैं। विदेश में यह कोर्स इंटरनेट के जानकार अनिवार्य रूप से कर रहे हैं।

जॉब प्रॉस्पेक्ट

इंटरनैशनल डेटा कॉर्प की एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व में इंफर्मेशन सिक्युरिटी प्रफेशनल्स की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगी। इस बढ़ी हुई जरूरत के कारण ही बड़ी-बड़ी आईटी और कम्यूनिकेशन कंपनियां तक एथिकल हैकर्स की नियुक्ति को प्राथमिकता दे रही है। आईटी और कंप्यूटर से जुड़ी कंपनियों के अलावा अन्य कंपनियों में भी साइबर स्पेस की सुरक्षा के लिए एथिकल हैकर्स की मांग बढ़ी है।
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एथिकल हैकिंग में बनाएं अपना कॅरियर,सेमीनार में दिए टिप्स जीजीएनआईएमटी में 


लुधियाना । एथिकल हैकिंग कंप्यूटर्स के फील्ड में काफी संभावनाओं भरा कॅरियर है। एथिकल हैकर बन कर आप सुरक्षित कॅरियर अपना सकते हैं। गुजरांवाला गुरु नानक इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (जीजीएनआईएमटी) में एथिकल हैकिंग एंड इट्स एसोसिएट कॅरियर विषय पर हुए सेमिनार में डा परमिंदर सिंह ने यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि एथिकल हैकिंग का उपयोग साइबर क्राइम को रोकने में महत्वपूर्ण है। इसकी सबसे ज्यादा मांग पुलिस मे हैं और मल्टीनेशनल कंपनियों में। यह कंपनियां अपने डाटा की सुरक्षा के लिए भी हैकर्स की सेवाएं लेती हैं। 

फिलहाल एथिकल हैकिंग का सबसे ज्यादा उपयोग पुलिस में हो रहा है। हर जिले में साइबर क्राइम सेल में ऐसे माहिरों की आवश्यकता है। एथिकल हैकिंग का अर्थ है कि अपनी इस कला का उपयोग जनहित में करना। पूना के स्कूल के अलावा कुछ निजी संस्थान यह कोर्स करवा रहे हैं। लेकिन इसके लिए टूल्स सिर्फ बताए जाते हैं, प्रेक्टिकल नहीं कराए जाते। सेमिनार में बीसीए एवं एमसीए के विद्यार्थियों ने भाग लिया। चलते प्रोग्राम में अपना कब्जा जमाना ही हैकिंग है।
पेंटरेशन टेस्टिंग, इंट्रयूजन टेस्टिंग एवं रेड टीमिंग आदि इसके नाम हैं। उन्होंने इस संबंध में उपयोग होने वाले टूल्स की जानकारी दी। कुलदीप सिंह, पीएस खट्टरा एवं गुणवंत दुआ भी इस मौके पर मौजूद थे।
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एथिकल हैकिंग के तरीके सुन स्टूडेंट्स रह गए दंग




एथिकल हैकिंग के तरीके सुन स्टूडेंट्स रह गए दंग
जयपुर। बदलते वक्त के साथ अपराध के तरीके भी बदल गए हैं। कभी एकाउंट हैकिंग तो कभी इन्फॉर्मेशन स्टोलेन जैसे कई साइबर क्राइम आज आम बात हो गई है। यह कहना था यंग एथिकल हैकिंग एक्सपर्ट हितेश चौधरी का, जो भांकरोटा स्थित राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर वीमेंस में गल्र्स को एथिकल हैकिंग के बारे में बता रहे थे। स्टूडेंट्स को एथिकल हैकिंग से बचाने और इसकी जानकारी देने के लिए कॉलेज की ओर से दो दिवसीय वर्कशॉप की शुरुआत मंगलवार को की गई। उन्होंने कहा कि क्राइम के तरीके हाइटेक हो चुके हैं। साथ ही टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट भी काफी हुए हैं। बस जरूरत है तो टेक्नोलॉजी को समझने की ओर उसके सही उपयोग की।



चौधरी ने आज के यूथ को टैक्नोलॉजी के सही इस्तेमाल और सही प्रस्तुतिकरण के बारे में बताया। कॉलेज के कंप्यूटर साइंस विभाग के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि आज के दौर में कोई भी आधुनिक तकनीक से अछूता नहीं है। हर उम्र वर्ग के लोग रोजमर्रा में कहीं न कहीं किसी तरह से इससे जुड़े हैं। फिर चाहे बैंक की जानकारी लेनी हो या रेलवे ई टिकिट बुक कराना हो। चौधरी से स्टूडेंट्स ने सवाल कर अपनी जिज्ञासा भी शांत की। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट पर भी काम करते समय सावधानी बरतने की बात की। साथ ही उसमें फोटो लगाते समय भी फोटो की साइज और पिक्सल आदि की जानकारी दी।
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बन जाइए एथिकल हैकर! How to become Ethical Hacker


इंट्रो : आईटी क्षेत्र में एथिकल हैकिंग कैरियर केलिहाज से एक नई राह है। एथिकल हैकर बनकर आईटी सिक्योरिटी की फील्ड में युवा अपने भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।



पवन दुग्गल --- ''आज कंपनियों को अपनी आईटी सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए अच्छे एथिकल हैकरों जरूरत है। इस फील्ड में प्रवेश के लिए आईटी डिगरी होना जरूरी नहीं, इंटरनेट और हैकिंग टेक्नीक्स में तीव्र इच्छा रखने वाले युवा भी यहां आ सकते हैं।ÓÓ

आमतौर पर आईटी क्षेत्र में 'हैकिंगÓ शब्द का इस्तेमाल नकारात्मक तौर पर किया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि इसके पीछे रोजगार का एक विस्तृत क्षेत्र छिपा है जिसका नाम है 'आईटी सिक्योरिटीÓ। दरअसल बढ़ते साइबर क्राइम से निपटने और कंप्यूटर सिस्टम की दुनिया में असुरक्षित घुसपैठ रोकने के लिए 'एथिकल हैकिंगÓ एक नई और कारगर फील्ड बनकर उभरी है। आज बड़ी संख्या में देश के युवा आईटी सिक्योरिटी वल्र्ड में कैरियर बनाने के उद्देश्य से इस ओर रुख कर रहे हैं।

क्या होता है काम
एथिकल हैकर एक तरह से आईटी सिक्योरिटी प्रोफेशनल होता है। उसमें वह सभी खूबियां होती है जो एक हैकर में होती है, लेकिन इन खूबियों का इस्तेमाल वह कै्रकिंग में न करके कंप्यूटर और साइबर वल्र्ड में सुरक्षात्मक उद्देश्यों के लिए करते हैं। इन्हें सुरक्षा विश्लेषक, पैनीट्रेशन टेस्टर्स या वाइटहैट हैकर भी कहा जाता है। ये कंपनी के इंफोरमेशन सिस्टम को ब्लैकहैट हैकर्स से सुरक्षित रखते हैं। अकसर ब्लैकहैट हैकर कंपनी के आईटी नेटवर्किंग सिस्टम या सर्वर में तकनीकी घुसपैठ कर उसे नुकसान पहुंचाते हैं। इन गड़बडिय़ों को रोकना इन्हीं प्रोफेशनल्स का काम होता है। कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क एक्सेस की सुरक्षा नीतियां क्या होंगी, इसकी जिम्मेदारी भी इन्हीं लोगों की होती है। इन नीतियों में इंटरनेट एक्सेस मैथड्स, पासवर्ड यूसेज और सर्वर द्वारा डाटा एक्सेस आदि शामिल होते हैं।

कैसे बन सकते हैं एथिकल हैकर
जाने माने साइबर एक्टपर्ट पवन दुग्गल ने बताया कि यह फील्ड टेक्नीकल बैग्रांड की मांग करती है, यही वजह है कि आज आईटी ग्रेजुएट्स बढ़ी संख्या में इस फील्ड में भविष्य बना रहे हैं। लेकिन यहां आने के लिए किसी आईटी डिगरी अनिवार्य नहीं होती। उन्होंने बताया युवाओं में इस ओर बढ़ते रुझान के कारण देश-विदेश में विभिन्न संस्थान एथिकल हैकिंग समेत आईटी सिक्योरिटी से संबंधित बहुतेरे कोर्स संचालित करने लगे हैं, जिसे कर नॉन टेक्नीकल लाइन के विद्यार्थी भी इस फील्ड में कैरियर बना सकते है, बशर्ते नवीनतम हैकिंग टेक्नोलॉजी में उनकी जबरदस्त रुचि हो।

पवन दुग्गल ने बताया कि एक प्रोफेशनल एथिकल हैकर बनने के लिए बेसिक एथिकल हैकिंग ट्रेनिंग सबसे जरूरी है। हैदराबाद में स्कूल ऑफ एथिकल हैकिंग के अलावा देश भर में इस कोर्स के लिए बहुत से संस्थान खुले हए हैं। 'ई-काउंसिल सर्टिफाइड एथिकल हैकरÓ कोर्स से इस फील्ड में कैरियर की शुरुआत की जा सकती है। ई-काउंसिल द्वारा संचालित इस कोर्स को करने के लिए आवेदक को विंडो या लाइनेक्स जैसे किसी एक ऑपरेटिंग सिस्टम का ज्ञान होना चाहिए। साथ ही नेटवर्किंग में एक साल का अनुभव और ओएसआई एवं टीसीपी/आईपी मॉडल्स के बारे में भी अच्छी जानकारी होनी चाहिए। ईसी-काउंसिल द्वारा संचालित विभिन्न आईटी सिक्योरिटी कोर्सेज की अधिक जानकारी के लिए इसकी वेबसाइट द्धह्लह्लश्च://222.द्गष्ष्शह्


वठ्ठष्द्बद्य.शह्म्द्द पर लॉग-इन कर सकते हैं। वैसे इस फील्ड में कैरियर बनाने के लिए भारत के अनेक संस्थानों में 'अंकित फारिया सर्टिफाइड एथिकल हैकिंग कोर्सÓ उपलब्ध है। इसके अलावा ऑनलाइन कोर्स का विकल्प भी खुला है।



कहां है रोजगार
नेसकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगले साल मार्केट में आईटी सिक्योरिटी एक्सपर्ट की मांग १० लाख तक पहुंच जाएगी।

पवन दुग्गल ने बताया कि आज साइबर और आईटी एक्ट के चलते तमाम कंपनियां कंप्यूटर, नेटवर्किंग और साइबर सिस्टम की सुरक्षा को लेकर काफी एहतियात बरत रही हैं। एथिकल हैकर ही उन्हें यह सिक्योरिटी मुहैया कराकर कानूनी झमेलों से बचाते हैं। कोर्स करने के बाद विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों, छोटी और मध्यम आकार की इंटरप्राइसिस में बड़े पैमाने सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेटर, नेटवर्क सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट या सिक्योरिटी विश्लेषक जैसे विभिन्न पदों पर नौकरियां मिल सकती हैं। बैंक, बीपीओ, साइबर सिक्योरिटी और फोरेंसिक आर्गेनाइजेशन्स में इन प्रोफेशनल्स के लिए बेशुमार रोजगार के मौके हैं। सरकारी विभागों की साइबर सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली विभिन्न संस्थाओं में भी मौका मिल सकता है। समय समय पर अनेक आईटी कंपनियां अन्य कंपनियों की साइबर सिस्टम सिक्योर करने केलिए कॉन्ट्रेक्ट लेती है, जहां पार्ट टाइम काम करने का मौका भी मिल सकता है। इसके अलावा अगर आप जॉब में इंटरस्टेड नहीं है तो बतौर साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट भी अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

कमाई
इस क्षेत्र में आपको कमाई को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं। यहां फ्रैशर को सालाना ३ से ४.५ लाख रुपये की नौकरी मिल सकती है। चार से पांच साल का अनुभव होने केबाद बड़ी आईटी साफ्टवेयर कंपनियों में रोजगार मिल सकता है, जहां १० से १४ लाख का पैकेज मिलने की उम्मीद होती है। और अधिक अनुभव होने पर विदेशों में मौजूद नामी-गिरामी आईटी कंपनियों के साथ काम करने का अवसर भी मिल सकता है।

बॉक्स मैटर
इस क्षेत्र के शिखर पर पहुंच चुकेअंकित फारिया आईटी सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के समक्ष एक बेहतरीन मिसाल हैं। इस फील्ड में अपनी जबरदस्त पैठ जमा चुके२४ वर्षीय अंकित आज विश्वप्रसिद्घ एथिकल हैकर हैं। वह इस विषय पर कई किताबें भी लिख चुकेहैं। वर्तमान में दिल्ली पुलिस को साइबर सिक्योरिटी की टे्रनिंग दे रहे हैं।

बॉक्स मैटर
कोर्सेज
सर्टिफाइड एथिकल हैकर
कंप्यूटर हैकिंग फॉरेंसिक इंवेस्टिगेटर
ईसी-काउंसिल सर्टिफिकेट सिक्योरिटी एनालिस्ट
सर्टिफाइड नेटवर्क डिफेंस आर्किटेक्ट
अंकित फारिया सर्टिफाइड एथिकल हैकिंग
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एथिकल हैकिंग साइबर वर्ल्ड के बनें पहरेदार


दुनियाभर में लोगों, संस्थाओं और कंपनियों की कंप्यूटर पर बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर अपराधियों की धमक भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में कंप्यूटर के जरूरी डेटा को हैकर्स से बचाये रखने के लिए ‘एथिकल हैकर्स’ की मांग आज तेजी से बढ़ रही है. क्या है एथिकल हैकिंग और कैसा है इस क्षेत्र में कॅरियर, जानकारी दे रहा है अवसर..

सारी दुनिया पर ‘साइबर अपराध’ का खतरा लगातार बढ़ रहा है. कंप्यूटर और ऑनलाइन सेवाओं पर लोगों और कंपनियों की बढ़ती निर्भरता के बीच कंप्यूटर हैक करने वाले अपराधियों की धमक भी तेजी से बढ़ रही है. हाल के कुछ वर्षो में कंप्यूटर से महत्वपूर्ण गोपनीय दस्तावेज लीक होने और इमेल हैकिंग की घटनाएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ी हैं. इससे व्यक्ति विशेष ही नहीं, संस्थान और देश की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गयी है.

इस मामले में भारत को सबसे ज्यादा खतरा चीन से है, जहां के हैकरों ने भारत के खिलाफ एक साइबर जंग शुरू कर रखी है. चीन में स्थित हैकरों के समूह भारतीय कंप्यूटरों और वेबसाइटों को समय-समय पर निशाना बना रहे हैं. चीनी हैकर भारत के नेशनल इन्फॉरमेटिक्स सेंटर और विदेश मंत्रलय को भी निशाना बना चुके हैं. इनके द्वारा अति संवेदनशील जानकारियां चुरायी जा रही हैं.
हालांकि हैकिंग का सिर्फ नकारात्मक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. हैकिंग के विशेषज्ञ सरकार और सरकारी एजेंसियों को मदद भी पहुंचाते हैं. सरकारी और खुफिया एजेंसियां भी हैकिंग के जरिये अपने काम की सूचनाएं और सबूत जुटाती हैं. यही कारण है कि देश और दुनिया के कई संस्थान अब ऐसे विशेषज्ञ तैयार करने के लिए एथिकल हैकिंग का कोर्स भी कराती हैं.
क्या है एथिकल हैकिंग
सुरक्षा के मद्देनजर सभी कंप्यूटर और ऑनलाइन अकाउंट के लिए पासवर्ड सेट किये जाते हैं. ये पासवर्ड ज्यादा सुरक्षित हों, इसके लिए कई तरीके भी बताये जाते हैं. बावजूद इसके अकसर महत्वपूर्ण जानकारियां पलक झपकते ही देश की सरहद से दूर बैठे लोगों तक पहुंच जा रही हैं. हैकिंग का यह काम कंप्यूटर के जानकारों द्वारा किया जाता है. ऐसी अनधिकृत हैकिंग रोकने का जिम्मा एथिकल हैकर का होता है और इस पूरी प्रक्रिया को एथिकल हैकिंग का नाम दिया गया है.
एक दशक पहले 2002 में आयी अनुपम खेर निर्देशित फिल्म ओम जय जगदीश कुछ इसी थीम पर थी. कॉलेज के प्रधानाचार्य के ऑफिस के कंप्यूटर से प्रश्न पत्र निकालने पर अभिषेक बच्चन को हैकर यानी कंप्यूटर चोर घोषित कर दिया जाता है. वहीं हैकिंग रोकने के लिए बनाये गये सॉफ्यवेयर को एक बड़ी कंपनी में बेचने पर उसे भारी रकम मिलती है. इस उदाहरण को यहां पेश करने का मकसद यह बताना है कि दूसरे केस में अभिषेक बच्चन ने एक एथिकल हैकर का काम किया और बड़े पैमाने पर चल रही हैंकिंग को 100 सेकेंड में रोकने लायक एक सॉफ्टवेयर बनाया.
आकड़ों की नजर में इंडस्ट्री
एथिकल हैकिंग का प्रयोग सबसे पहले 1980 के दशक में देखने को मिला था. 1990 तक आते-आते इसमें रोजगार मिलना शुरू हो गया. उस दौरान यह नाम कुछ ही लोगों की जुबान पर था. धीरे-धीरे यह प्रचलन में आ गया. नासकॉम की एक रिपोर्ट की मानें तो देश में 77 हजार एथिकल हैकरों की प्रतिवर्ष आवश्यकता है, जबकि 25-30 हजार प्रोफेशनल्स ही प्रतिवर्ष सामने आ रहे हैं. यानी आवश्यकता के हिसाब से पूर्ति बहुत कम है. मुंबई पर आतंकी हमले के बाद इसकी मांग में और तेजी आयी. रिपोर्ट के अनुसार यह मांग आने वाले समय में और अधिक बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि हर क्षेत्र में कंप्यूटर का दखल बढ़ता जा रहा है और लोग अपनी सारी गोपनीय जानकारियां कंप्यूटर में ही रखना चाह रहे हैं.
कब करें यह कोर्स
एथिकल हैकिंग से संबंधित कई तरह की डिग्री और डिप्लोमा कोर्स आज मौजूद हैं. कुछ कोर्स ऐसे भी हैं, जिनमें एथिकल हैकिंग एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है. हर कोर्स के लिए अलग योग्यता है. वैसे सर्टिफाइड हैकर बनने के लिए इ-कॉमर्स काउंसिल का सर्टिफिकेट होना जरूरी है. इन योग्यताओं के साथ-साथ इसमें कंप्यूटर की जानकारी को सर्वोपरि रखा जाता है. बैचलर व मास्टर कोर्स कंप्यूटर एप्लीकेशन से संबंधित होते हैं. बैचलर कोर्स में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा पास करना जरूरी है. अंकित फाडिया सर्टिफाइड एथिकल हैकर कोर्स भी प्रचलन में है.
कोर्स से जुड़ी जानकारी
कोर्स के दौरान छात्रों को कंप्यूटर सिक्योरिटी से जुड़ी पूरी जानकारी प्रदान की जाती है. क्लास में प्रेजेंटेशन टेस्ट, गैजेट्स की जानकारी, हैकिंग, पासवर्ड क्रैकिंग, मालवेयर एनालिसिस, पोर्ट स्कैनिंग, बफर ओवरफ्लो आदि के बारे में विस्तार से बताया जाता है. कोर्स के दौरान ही छात्र सिक्योरिटी से संबंधित समस्याओं की रिपोर्ट करने, नियम के दायरे में रहकर काम करने, बायोमेट्रिक्स सिस्टम पर प्रोजेक्ट तैयार करने और हालिया घटित हैकिंग के कुछ नये मामलों पर चर्चा करते हैं.
कंप्यूटर नेटवर्किग का रखें ज्ञान
इस प्रोफेशन में सबसे जरूरी है कंप्यूटर नेटवर्किग नॉलेज. बिना इसके लंबी रेस का घोड़ा नहीं बना जा सकता. इसके अलावा प्रोफेशनल्स को जावा, यूनिक्स व सी++ में भी दक्ष होना जरूरी है. साथ ही उसे अपना दिमाग हमेशा खुला रखना होगा और नेटवर्किग से जुड़ी हर जानकारी को आत्मसात करना होगा. प्रॉब्लम सॉल्विंग, एनालिटिकल स्किल्स, सिक्योरिटी सिस्टम और कंप्यूटर का गहरा ज्ञान लाभकारी रहेगा.
संभावनाएं हैं अपार
कोर्स समाप्त होने के बाद प्रोफेशनल्स को किसी कंपनी में सिक्योरिटी एनालिस्ट, चीफ इंफॉर्मेशन ऑफिसर, प्रेजेंटेशन टेस्टर व नेटवर्किग स्पेशलिस्ट के रूप में काम करने का अवसर मिलता है. प्रेजेंटेशन टेस्टर के रूप में प्रोफेशनल्स फायरवॉल की जांच करते हैं, जिससे कि गैर जरूरी चीजों का प्रवेश रोका जा सके. जबकि नेटवर्किग स्पेशलिस्ट को संस्थान के कंप्यूटर नेटवर्क, सॉफ्टवेयर आदि की सुरक्षा का जिम्मा होता है.
फायदे-नुकसान के साथ रोजगार
एथिकल हैकिंग का कोर्स करने के बाद उम्मीदवार बैंक, एयरलाइन्स, होटल्स, टेलीकॉम कंपनी, आउटसोर्सिग यूनिट्स, आइटी सर्विस कंपनी, रिटेल चेन, इंटरनेट फर्म्स आदि में काम कर सकते हैं. ध्यान रखें-
* यह एक चुनौतीपूर्ण और जॉब ओरिएंटेड कॅरियर है.
* काबिलियत की बदौलत अभ्यर्थी टॉप पर पहुंच सकते हैं.
* हर वक्त जानकारियों से अपडेट रहने की आवश्यकता.
* जरा सी चूक फेर सकती है मेहनत पर पानी.
आकर्षक है पैकेज
इसमें नौकरियां बहुत हैं, साथ ही आकर्षक सैलरी पैकेज भी. यह लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है. साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल के अनुसार इस क्षेत्र में शुरुआती दौर में 40 से 60 हजार रुपये प्रतिमाह की सैलरी मिलती है. यदि प्रोफेशनल्स के अंदर स्किल्स हैं, तो 80 से 90 हजार प्रतिमाह का भी पैकेज पा सकते है.
मल्टीनेशनल कंपनियों या विदेश जाकर नौकरी करने पर यह पैकेज काफी ज्यादा होता है. यदि प्रोफेशनल्स  अपना खुद का काम कर रहे हैं, तो वह अपनी क्षमता की बदौलत कमाई सकते हैं.
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एथिकल हैकिंग २

जैसे-जैसे कंप्यूटर और इंटरनेट पर हमारी निर्भरत बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे हम साइबर अपराध के गिरफ्त में आते जा रहे हैं. हाल के कुछ वर्षो में इंटरनेट के जरिए कंप्यूटर से महत्वपूर्ण व गोपनीय दस्तावेज लीक होने और इ-मेल हैकिंग की घटनाएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ी हैं. इससे व्यक्ति विशेष ही नहीं, संस्थान और देश की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गयी है. इस मामले में भारत को सबसे ज्यादा खतरा चीन से है, जहां के हैकरों ने भारत के खिलाफ एक साइबर जंग शुरू कर रखी है.
चीन में स्थित हैकरों के समूह भारतीय कंप्यूटरों और वेबसाइटों को समय-समय पर निशाना बनाते रहे हैं. चीनी हैकर भारत के नेशनल इनफॉरमेटिक्स सेंटर और विदेश मंत्रलय को भी निशाना बना चुके हैं. ऐसे में हैकिंग के विशेषज्ञ सरकार और सरकारी एजेंसियों को मदद पहुंचाते हैं. मोटे तौर पर कहें तो ऐसी अनिधकृत हैकिंग को रोकने का जिम्मा एथिकल हैकर का होता है और इस पूरी प्रक्रि या को ‘एथिकल हैकिंग’ का नाम दिया गया है.
अब तक जहां हैकिंग को केवल नकारात्मक रूप में जाना जाता था, एथिकल हैंकिंग उसका दूसरा पहलू है. एथिकल हैकिंग का प्रयोग सबसे पहले 1980 के दशक में देखने को मिला था. 1990 तक आते-आते इसका विस्तार हुआ और आज कई संस्थान साइबर अपराध से निपटने के लिए बकायदा एथिकल हैकरों की कुशल टीम तैयार कर रहे हैं.
एक एथिकल हैकर को कंप्यूटर के साथ नेटवर्किग की गहन समझ होती है. एक अपराधी की तरह वह भांप सकता है. तमाम साइबर क्राइम से निबटने व संस्थाओं के आइटी सिस्टम्स को सुरक्षा देने में एथिकल हैकरों की अहम भूमिका होती है.

और ये रहे इसी सवाल पर आपके मजेदार जवाब
* साइबर वल्र्ड की पुलिसिया टीम जो कारवाई करती है, उसे एथिकल हैकिंग कहते हैं.
रंजीत मंडल, जसीडीह
* एथिकल हैकिंग के जरिए कंप्यूटर व इंटरनेट से छेड़छाड़ करनेवाले मुजरिमों को सबक सिखाया जाता है.
श्रीराम, झरिया
*किसी दूसरे के इ-मेल को बिंदास देखने का लाइसेंस है एथिकल हैकिंग.
विकास ओझा, गया

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्यों होता है?
थर्ड पार्टी इंश्योरेंस एक ऐसा कवर है, जो फस्र्ट पार्टी यानी इंश्योर्ड शख्स के द्वारा थर्ड पार्टी को हुए नुकसान के लिए होता है. इसे समझने के लिए पहले फस्र्ट, सेकेंड और थर्ड पार्टी को जानना जरूरी है. फस्र्ट पार्टी वह शख्स होता है, जो अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस करा रहा है. सेकेंड पार्टी इंश्योरेंस वह कंपनी होती है, जिससे यह कवर लिया गया है.
थर्ड पार्टी कोई तीसरा शख्स होता है, जिसे फस्र्ट पार्टी की वजह से नुकसान पहुंचा है. थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में इस तीसरे शख्स को होनेवाले नुकसान की भरपाई की जाती है यानी अगर आपकी गाड़ी से सड़क पर चल रही दूसरी गाड़ी या किसी शख्स को नुकसान होता है तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कवर के तहत उस शख्स को हुए नुकसान की भरपाई आपकी इंश्योरेंस कंपनी करेगी. इसके लिए सालाना प्रीमियम की रकम निर्धारित होती है, जो कार या टू-व्हीलर की क्षमता पर निर्भर करती है.
इस बारे में नियम यह है कि बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराये कोई भी गाड़ी सड़क पर नहीं आ सकती. इसे कराना अनिवार्य होता है. अपनी गाड़ी को होनेवाले नुकसान के लिए (ओन डैमेज इंश्योरेंस) भी आप इंश्योरेंस करा सकते हैं और नहीं भी, लेकिन थर्ड पार्टी कराना इंश्योरेंस कराना जरूरी होता है. सड़क पर दौड़ती तमाम पुरानी गाड़ियों का आमतौर पर सिर्फथर्ड पार्टी इंश्योरेंस कवर ही होता है.

और ये रहे इसी सवाल पर आपके मजेदार जवाब
*अगर दो व्यक्ति मिलकर किसी तीसरे का बीमा कराते हैं, तो उसे थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कहते हैं.
निकिता धर, गोमो
*सड़क पर दो गाड़ियों के टक्कर के बीच अगर कोई तीसरा गाड़ी पीस जाये, तो इसका हर्जाना लेने के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना बहुत जरूरी होता है.
मनतोष दास, हजारीबाग
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एथिकल हैकर की डिमांड ज्यादा


कोटा। पहली बार कोटा आए युवा एथिकल हैकर अंकित फाडिया ने भास्कर से खास बातचीत में कहा कि दुनियाभर में हैकिंग व साइबर क्राइम से सरकारें, सेना, पुलिस, बैंक, कापरेरेट सेक्टर और इंटरनेट यूजर्स खासे परेशान हैं। एथिकल हैकर्स की डिमांड ज्यादा होने से इसमें अच्छा कॅरिअर बनाया जा सकता है। इसके लिए एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, नेटवर्किग, यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का नॉलेज और एक क्रिमिनल की तरह सोचने की क्षमता होना जरूरी है।




उन्होंने कहा कि वाईफाई नेटवर्क होने से साइबर आतंकी कभी भी संसद की गोपनीय सूचनाएं भी हैक कर सकते हैं। इससे बचने के लिए हमें साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी और साइबर ऑडिट जैसे विकल्पों पर तेजी से अमल करना होगा। संवेदनशील डाटा ऑनलाइन होने से हाई रिस्क रहती है, इसे कोई भी क्रिमिनल हैकर सर्च कर सकता है। बचपन में खेल-खेल में हैकिंग करने वाले अंकित एथिकल हैकर के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके हैं।
४५ देशों में १ हजार लाइव सेमिनार

कार्यक्रम संयोजक अविनाश बेदी ने बताया कि 25 साल के अंकित फाडिया अब तक हैकिंग पर 14 किताबें लिख चुके हैं। उन्होंने 12 साल की उम्र में देश में हैकिंग पर सबसे पहली किताब लिख दी थी। अब तक 45 से ज्यादा देशों में 1 हजार लाइव सेमिनार व कंसलटेंसी ट्रेनिंग दे चुके फाडिया डिजिटल इंटेलीजेंस कंसल्टेंट भी हैं। वे ईथिकल हैकिंग पर पीजी डिप्लोमा व डिग्री कोर्स भी चलाते हैं। भारत-पाक साइबर आतंकी हमले के दौरान 16 साल की उम्र में आतंकी धमकियां मिलने पर उन्हें 7 दिन पुलिस सुरक्षा में रहना पड़ा था।
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http://hinditechpanthi.blogspot.in/2011/11/hackingwhat-is-it.html

हैकिंग - ये क्या है?|| Hacking–What is it?


"हैकिंग" गतिविधियाँ , पिछले दशक से कला का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं. तकनीकी भाषा में हैकिंग का अर्थ होता है किसी कंप्यूटर नेटवर्क में प्रवेश करना उससे जानकारी अथवा तथ्य प्राप्त करने हेतु , यह प्रवेश अधिकृत अथवा अनधिकृत हो सकता है | किंतु यहाँ ये बताना अत्यंत आवश्यक है, की आजकल अनधिकृत प्रवेश को क्रैकिंग कहा जाने लगा है, आज से एक दशक पहले हैकिंग को तीन भागों में विभाजित किया जाता था {और यकीन मानिए, वैश्वीकरण  के इस युग में भी हम इस मामले में थोड़े से पिछड़े हुए हैं और अगर आप आज भी कहीं बाहर एथिकल हैकिंग का कोर्स करने जाते हैं तो आप पाएगे की ज्यादातर किताबों में आज भी इसका वर्गीकरण पिछले दशक की जानकारी पर ही किया जा रहा है}, ये तीन भाग हैं -
  1. व्हाईट हैट हैकर , अर्थात वह हैकर जो मौलिक रूप से किसी गलत उद्देश्य से कंप्यूटर नेटवर्क में प्रवेश नहीं करता है 
  2. ग्रे हैट हैकर, अर्थात वह हैकर जिसका प्रवेश मौलिक रूप से गलत तो होता है पर उसका उद्देश्य नेटवर्क पर लिंक्ड कंप्यूटर को नुक्सान पहुँचाना या डाटा चोरी नहीं होता है 
  3. ब्लैक हैट हैकर, अर्थात वह व्यक्ति जिसका उद्देश्य हानि पहुँचाना या/और डाटा चोरी होता है
बदलते तकनीकी परिवेश के साथ ही यह वर्गीकरण भी बदलता जा रहा है, और जैसा आप इस लेख की शुरुआत पढ़ कर अनुमान लगा ही सकते हैं की अब तीसरी श्रेणी यानि ब्लैक हैट हैकर्स को “क्रैकर्स” कहा जाता है,
इसी बदलाव के साथ अब आपको यह भी स्पष्ट करना चाहूँगा की आज के परिदृश्य में "हैकर" का मतलब एक ऐसे कंप्यूटर विशेषज्ञ से है, जो अपने तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर कंप्यूटर नेटवर्क की बारीक से बारीक दरार को भी ढूंढ सकता है और उसे बंद कर सकता है, जिससे कोई अवांछित व्यक्ति उसमे से नेटवर्क में प्रवेश करके डाटा से हेर फेर ना कर सके या नेटवर्क को नुक्सान न पहुंचा सके |
इस चिट्ठे की पहली तकनीकी पोस्ट होने के नाते मैं इसे संक्षिप्त ही रख रहा हूँ, आशा है आपकी टिप्पणियों के जरिये आपके सुझाव, रुझान इत्यादि के बारे में जान पाऊंगा और आने वाली पोस्टों में आपको और अधिक हैकिंग और क्रैकिंग तथा अन्य टैकपंथी के बारे में अवगत करा पाऊंगा |

~आभार~
(आपके सुझावों तथा टिप्पणियों का इंतज़ार रहेगा) 
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Windows XP

In Windows XP a simple trick is using the hosts file, and it goes this way:
  1. 1
    Open MyComputer

  2. 2
    Browse C: (or your Operating system drive)
  3. 3
    Browse Windows –>System32–>drivers–>etc So the Location will be C:\WINDOWS\system32\drivers\etc In the etc folder look for the file hosts
  4. 4
    Open this file hosts with notepad.
  5. 5
    At the bottom of the file, add the line as shown below:
  6. 6
    127.0.0.1 www.xxx.com
  7. 7
    127.0.0.1 www.xxx.com
  8. 8
    Save the file.











How to Block a Website on Your PC

How to Block a Website on Your PC


Monday, 15 July 2013

Sunday, 14 July 2013

ENLIGHTENING PUBLIC ADMINISTRATION LECTURES-Videos Courtesy CEC UGC EDUSAT

facebook page for Public Administration https://www.facebook.com/pages/Public-Administration-Guidance-for-All-UPSC-State-PCS-UGC-NET-BA-MA/483862818317743


1) Civil Services Exam. : Public Administration (Optional Subject):
http://www.youtube.com/watch?v=cJJoG6SrdIo

2) Inclusive Governance - Public Administration:
http://www.youtube.com/watch?v=HA6J7ExMmpE & http://www.youtube.com/watch?v=9R682RfLxuo

3) Development Administration:
http://www.youtube.com/watch?v=ORWOn8om63M & http://www.youtube.com/watch?v=uNbhXSQfeLU

4) Public Administration Evolution:
http://www.youtube.com/watch?v=YxHVIux5KF4

5) Judicial Administration in India :
http://www.youtube.com/watch?v=1-GtacJCL2g

6) Behavioural Approach - Public Administration:
http://www.youtube.com/watch?v=tjg2nERHnH0

7) Administrative Behaviour:
http://www.youtube.com/watch?v=hQ1ndV3cDX8

8) Public Administration : Decentralization and Development in India:
http://www.youtube.com/watch?v=tge6OIoPYag

9) Socio-Psychological Approach:
http://www.youtube.com/watch?v=VgENEmFVz-U

10) Public Administration in the 21st Century:
http://www.youtube.com/watch?v=a7rrlaF_ga0

11) Administrative Theory and Approaches - Part 1:
http://www.youtube.com/watch?v=En5qEV28r-Q & http://www.youtube.com/watch?v=rqAaqOvj83I

12) Idea of Inclusive democracy:
http://www.youtube.com/watch?v=kDwfz9T5LUY

13) The Changing Contour of Administration Part 1 & Part 2 & Part 3 :
http://www.youtube.com/watch?v=N2XiAchcq-U & http://www.youtube.com/watch?v=L6cFUicj3dI &http://www.youtube.com/watch?v=SbRD0z7Mqag

14) Administrative Theory and Approaches - Part 2:
http://www.youtube.com/watch?v=9mLmjMrhbbo

15) Mughal Period and it's Adminisration:
http://www.youtube.com/watch?v=BwCr7E79464

16) Organisational Behaviour Part 1 & Part 2:
http://www.youtube.com/watch?v=qdlG2DObuvc&playnext=1&list=PLTxEXRyZ5igPtCWdxlBJO8f4UjPCWXa4f&feature=results_video &http://www.youtube.com/watch?v=3yb2lUnf-7A

17) Planning In India Part 1, Part 2 And Part 3:
http://www.youtube.com/watch?v=uv8hK1Wk4c4 & http://www.youtube.com/watch?v=3sZ6-06drj4 &http://www.youtube.com/watch?v=Uws3z2GE2wY

18) New Public Management:
http://www.youtube.com/watch?v=gu3jDF7rwD4

19) Panchayati Raj System In India:
http://www.youtube.com/watch?v=R87a11rK0FA

20) Politics & Governance:
http://www.youtube.com/watch?v=pwyD0rZMj10


facebook page for Public Administration https://www.facebook.com/pages/Public-Administration-Guidance-for-All-UPSC-State-PCS-UGC-NET-BA-MA/483862818317743